राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद ट्रस्ट की पहली बड़ी बैठक, चंपत राय को नहीं मिली एंट्री; सुरक्षा व्यवस्था और जांच रिपोर्ट पर मंथन
AIN NEWS 1: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले के सामने आने के बाद सोमवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक लगभग ढाई घंटे से अधिक समय तक चली, जिसमें ट्रस्ट की व्यवस्था, सुरक्षा, जांच रिपोर्ट और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। पूरे घटनाक्रम पर देशभर की नजर बनी रही क्योंकि यह बैठक चढ़ावा चोरी के बाद ट्रस्ट की पहली आधिकारिक बैठक थी।

सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए। ट्रस्ट से जुड़े सेवादारों और सुरक्षा कर्मियों को भी बैठक कक्ष से बाहर रखा गया। इतना ही नहीं, बैठक में शामिल ट्रस्ट सदस्यों के मोबाइल फोन भी प्रवेश द्वार पर जमा करा लिए गए ताकि बैठक की गोपनीयता बनी रहे और अंदर की चर्चाएं बाहर न पहुंच सकें।
चंपत राय और गोपाल राव को बैठक में नहीं मिली एंट्री
सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और गोपाल राव बैठक में शामिल होने के लिए मंदिर परिसर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें बैठक में प्रवेश नहीं दिया गया। दोनों मंदिर परिसर के एक कमरे में मौजूद रहे। वहीं ट्रस्टी अनिल मिश्रा भी बैठक में शामिल नहीं हुए।
हालांकि, इस संबंध में ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। इस विषय पर अंतिम आधिकारिक जानकारी बैठक के बाद जारी होने की संभावना जताई गई।
महंत नृत्य गोपाल दास ने की बैठक की अध्यक्षता
बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने की। इससे पहले ऐसी चर्चाएं थीं कि वह बैठक में शामिल नहीं होंगे, लेकिन बाद में उन्होंने स्वयं बैठक की कमान संभाली।
बैठक में ट्रस्ट के कई सदस्य मौजूद रहे, जबकि पदेन सदस्य वरिष्ठ विधिवेत्ता के. पाराशरण, पूर्व नौकरशाह नृपेंद्र मिश्रा, केंद्र सरकार के प्रतिनिधि प्रशांत लोखंडे तथा उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि संजय प्रसाद ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।
चढ़ावा चोरी पर पहली बार बोले महंत नृत्य गोपाल दास
बैठक शुरू होने से पहले महंत नृत्य गोपाल दास ने एक पत्र जारी कर चढ़ावा चोरी की घटना पर पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस घटना से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिसने भी इस प्रकार का पाप किया है, उसे कानून के अनुसार कठोर सजा मिलनी चाहिए।
उनके इस बयान को ट्रस्ट की ओर से चोरी के मामले पर सबसे महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
SIT जांच रिपोर्ट पर हुई विस्तार से चर्चा
सूत्रों के अनुसार, बैठक में विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा हुई। ट्रस्ट सदस्यों ने जांच से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा की और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नए उपायों पर विचार किया।
बताया गया कि कई ट्रस्टियों ने चढ़ावा चोरी की घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए व्यवस्था में सामने आई कमियों पर गंभीर चर्चा की। सदस्यों का मानना था कि मंदिर जैसी आस्था के केंद्र में सुरक्षा व्यवस्था किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं होनी चाहिए।
सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत
बैठक में इस बात पर व्यापक सहमति बनी कि भविष्य में दान पेटियों, नकदी संग्रह, रिकॉर्ड प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, मंदिर परिसर में आधुनिक निगरानी प्रणाली, अतिरिक्त सुरक्षा उपाय, दान संग्रह प्रक्रिया की नियमित ऑडिट व्यवस्था तथा जवाबदेही तय करने जैसे कई सुझावों पर विचार किया गया। हालांकि अंतिम निर्णय की आधिकारिक घोषणा ट्रस्ट की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ही की जाएगी।
CEO मॉडल पर नहीं बनी सहमति
बैठक के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर श्रीराम मंदिर के संचालन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का प्रस्ताव भी चर्चा में आया।
लेकिन सूत्रों के अनुसार, अधिकांश ट्रस्ट सदस्यों ने इस मॉडल को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका मानना था कि वर्तमान ट्रस्ट व्यवस्था के भीतर सुधार कर मंदिर का संचालन प्रभावी ढंग से किया जा सकता है और अलग से CEO नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं है।
बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की संभावना
सूत्रों के अनुसार, बैठक समाप्त होने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकता है। इस दौरान बैठक में लिए गए फैसलों, सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव, जांच रिपोर्ट और आगे की कार्ययोजना की जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है।
देशभर के श्रद्धालु और आम लोग इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि इससे चढ़ावा चोरी मामले पर ट्रस्ट का आधिकारिक पक्ष सामने आएगा।
ट्रस्ट में प्रस्ताव कैसे होता है पारित?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कुल 14 सदस्य हैं, जिनमें 4 पदेन सदस्य शामिल हैं। नियमों के अनुसार किसी भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव को पारित करने के लिए दो-तिहाई सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है।
पदेन सदस्यों के मतों की गणना प्रस्ताव पारित करने में नहीं होती। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद वर्तमान में प्रभावी सदस्यों की संख्या कम हो गई है। ऐसे में किसी भी बड़े निर्णय के लिए कम से कम छह सदस्यों की सहमति आवश्यक मानी जा रही है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की प्रमुख जिम्मेदारियां
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन 5 फरवरी 2020 को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद केंद्र सरकार द्वारा किया गया था।
ट्रस्ट की प्रमुख जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं—
राम मंदिर परिसर के निर्माण और विकास की देखरेख।
लगभग 70.5 एकड़ परिसर का संचालन और रखरखाव।
श्रद्धालुओं से प्राप्त दान और चढ़ावे का प्रबंधन।
मंदिर से जुड़े सभी महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विकास संबंधी निर्णय लेना।
मंदिर की सुरक्षा, व्यवस्था और भविष्य की योजनाओं का संचालन।
यह ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है। सरकार प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराती है, लेकिन ट्रस्ट के निर्णयों में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं करती। यही कारण है कि यह संस्था सूचना के अधिकार (RTI) के दायरे से भी बाहर है।
फिलहाल क्या है स्थिति?
फिलहाल ट्रस्ट की बैठक समाप्त होने और आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस का इंतजार किया जा रहा है। चढ़ावा चोरी की घटना के बाद यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें सुरक्षा व्यवस्था, जांच रिपोर्ट, प्रशासनिक सुधार और ट्रस्ट के भविष्य से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई है।
अब सभी की निगाहें ट्रस्ट की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि बैठक में कौन-कौन से प्रस्ताव पारित हुए, इस्तीफों पर अंतिम निर्णय क्या रहा और भविष्य में राम मंदिर की सुरक्षा एवं दान व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएंगे।
(नोट: इस खबर में शामिल कुछ जानकारियां विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से हैं। ट्रस्ट की आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस या लिखित बयान के बाद तथ्यों में बदलाव या अतिरिक्त जानकारी सामने आ सकती है।)
The Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust held its first crucial meeting following the Ram Mandir donation theft controversy in Ayodhya. The meeting focused on the SIT investigation, strengthening temple security, improving donation management, and discussing the resignations of Champat Rai and Anil Mishra. Reports also suggested that trustees considered stricter monitoring measures while rejecting the CEO model. The developments have brought renewed attention to Ram Mandir donation security, Ayodhya temple administration, and the future functioning of the trust.


















