AIN NEWS 1: रामपुर के पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सिंह सिसोदिया का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल वीडियो में एसपी गोकशी के मुद्दे पर बात करते हुए कुछ लोगों के लिए बेहद आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करते सुनाई दे रहे हैं। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैल गया कि रामपुर के कप्तान ने पूरे मुस्लिम समुदाय को ‘हरामी’ कह दिया। हालांकि, उपलब्ध वीडियो और सामने आई रिपोर्टों को देखने पर तस्वीर इससे कुछ अलग नजर आती है।
एसपी ने अपनी टिप्पणी में गोकशी करने वाले लोगों के संदर्भ में कहा कि सच्चा मुसलमान गोकशी नहीं कर सकता। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग ऐसा करते हैं, वे या तो मुसलमान नहीं हैं या फिर “बहुत हरामी” हैं। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का “इलाज करना” उनका काम है।
बयान सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस शुरू हो गई। एक तरफ कुछ लोगों ने पुलिस अधिकारी के शब्दों को लेकर सवाल उठाए, वहीं दूसरी तरफ यह भी कहा गया कि उनके बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है।

क्या कहा था रामपुर के एसपी ने?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एसपी अनिल कुमार सिंह सिसोदिया से गोकशी को लेकर सवाल किया गया था। जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सच्चा मुसलमान गोकशी नहीं कर सकता। इसके बाद उन्होंने गोकशी करने वालों के बारे में विवादित शब्द का इस्तेमाल किया।
उनके बयान का सार यह था कि जो व्यक्ति गोकशी करता है, वह इस्लाम की मूल भावना का पालन नहीं कर रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने ऐसे लोगों को “हरामी” कहा और आगे कहा कि ऐसे लोगों का इलाज करना पुलिस का काम है।
यही वह हिस्सा है, जिसकी वजह से पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
सोशल मीडिया पर क्या दावा किया जा रहा है?
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि रामपुर के कप्तान ने मुसलमानों को “हरामी” कहा। कई पोस्ट में इस दावे को राजनीतिक और साम्प्रदायिक रंग देते हुए शेयर किया गया।
लेकिन फैक्ट चेक के दौरान सामने आई जानकारी के मुताबिक यह कहना कि एसपी ने पूरे मुस्लिम समुदाय को हरामी कहा, सही नहीं होगा। उनके बयान में यह शब्द गोकशी करने वाले लोगों के संदर्भ में आया था।
हालांकि, इसका यह मतलब भी नहीं है कि पुलिस अधिकारी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द को सामान्य या उचित माना जाए। किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की सार्वजनिक टिप्पणी में भाषा की मर्यादा और संवेदनशीलता बेहद महत्वपूर्ण होती है, खासकर तब जब मामला धर्म और समुदाय से जुड़ा हो।
बयान के बाद एसपी ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद एसपी की ओर से सफाई भी सामने आई। रामपुर पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया माध्यम से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि बयान को गलत अर्थ में लिया जा रहा है।
एसपी ने अपनी बात का संदर्भ सावन के दौरान धार्मिक भावनाओं और साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने से जोड़ा। उनका कहना था कि पुलिस का उद्देश्य जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी टिप्पणी एक पत्रकार के सवाल के जवाब में आई थी और इसे किसी पूरे समुदाय के खिलाफ बयान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
दारुल उलूम देवबंद का भी किया संदर्भ
रिपोर्टों के मुताबिक एसपी ने अपनी सफाई में दारुल उलूम देवबंद की ओर से गोकशी को लेकर कही गई बातों का भी उल्लेख किया। उनका तर्क था कि धार्मिक समुदायों के बीच आपसी सम्मान और सद्भाव बना रहना जरूरी है।
गौर करने वाली बात यह है कि गोकशी का मुद्दा उत्तर प्रदेश में लंबे समय से संवेदनशील रहा है। ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन की भूमिका कानून-व्यवस्था बनाए रखने की होती है। इसलिए किसी भी अधिकारी के बयान को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
कौन हैं रामपुर के एसपी अनिल कुमार सिंह?
उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर अनिल कुमार सिंह का नाम रामपुर के पुलिस अधीक्षक के तौर पर दर्ज है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उनकी रामपुर में एसपी के पद पर तैनाती 17 जुलाई 2026 को हुई थी।
इससे साफ है कि रामपुर में उनकी पोस्टिंग हाल ही में हुई है। सोशल मीडिया पर चल रही कई पोस्ट में उनकी सेवा और रिटायरमेंट को लेकर भी अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
क्या छह महीने में रिटायर होने वाले हैं एसपी?
वायरल पोस्ट में यह भी लिखा जा रहा है कि रामपुर के कप्तान के रिटायरमेंट में केवल छह महीने बचे हैं। इस दावे की भी पड़ताल जरूरी है।
उत्तर प्रदेश पुलिस के उपलब्ध आधिकारिक प्रोफाइल में अनिल कुमार सिंह की जन्मतिथि 15 जनवरी 1967 दर्ज है। 8 अगस्त 2026 के हिसाब से उनकी उम्र करीब 59 वर्ष 7 महीने है।
इस आधार पर यह जरूर कहा जा सकता है कि वह सामान्य 60 वर्ष की आयु सीमा के काफी करीब हैं। लेकिन “ठीक छह महीने बाद रिटायरमेंट” को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक घोषणा या आदेश सामने नहीं आया है। इसलिए इस दावे को निश्चित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
बयान को लेकर सबसे बड़ा सवाल
पूरे विवाद का केंद्र यही है कि क्या एक पुलिस अधिकारी को सार्वजनिक रूप से इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए?
पुलिस अधिकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ निष्पक्ष और संयमित भाषा की अपेक्षा की जाती है। खासकर धार्मिक और सामुदायिक मामलों में अधिकारियों के शब्दों का असर आम नागरिकों से कहीं ज्यादा होता है।
एसपी का कहना है कि उनकी टिप्पणी गोकशी करने वाले लोगों के संदर्भ में थी और उसका उद्देश्य किसी पूरे समुदाय को निशाना बनाना नहीं था। लेकिन सोशल मीडिया पर बयान का छोटा हिस्सा वायरल होने से विवाद और बढ़ गया।
वायरल दावे और वास्तविकता में अंतर
इस पूरे मामले में तीन बातें अलग-अलग समझना जरूरी है।
पहली, एसपी ने विवादित शब्द का इस्तेमाल किया था। यह बात वीडियो और मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है।
दूसरी, उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने यह शब्द पूरे मुस्लिम समुदाय के लिए नहीं बल्कि गोकशी करने वाले लोगों के संदर्भ में इस्तेमाल किया था।
तीसरी, बयान के बाद एसपी की ओर से सफाई भी दी गई और उन्होंने अपने बयान का उद्देश्य साम्प्रदायिक सौहार्द तथा कानून-व्यवस्था से जोड़कर बताया।
इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे दावे को ज्यों का त्यों स्वीकार करने के बजाय बयान का पूरा संदर्भ देखना जरूरी है।
रामपुर के एसपी अनिल कुमार सिंह सिसोदिया का गोकशी को लेकर दिया गया बयान विवादों में है। उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए “हरामी” शब्द पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि वायरल पोस्ट में जिस तरह यह कहा जा रहा है कि उन्होंने पूरे मुस्लिम समुदाय को यह शब्द कहा, उपलब्ध जानकारी उस दावे की पुष्टि नहीं करती।
मामले में एसपी की सफाई भी सामने आ चुकी है। वहीं, उनकी रिटायरमेंट को लेकर भी सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि केवल छह महीने बचे हैं। आधिकारिक जन्मतिथि को देखते हुए वह 60 वर्ष की उम्र के करीब जरूर हैं, लेकिन रिटायरमेंट की सटीक तारीख को लेकर आधिकारिक आदेश के बिना कोई निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा।
ऐसे संवेदनशील मामलों में वीडियो के केवल एक हिस्से के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय पूरा बयान, उसका संदर्भ और संबंधित अधिकारी की सफाई देखना ज्यादा जरूरी है।
Rampur SP Anil Kumar Singh Sisodia has faced controversy over his remarks regarding cow slaughter in Uttar Pradesh. A viral video and social media posts claimed that the Rampur SP called Muslims “harami,” but available reports indicate that the controversial word was used specifically while referring to people involved in cow slaughter, not the entire Muslim community. The Rampur police officer later clarified his remarks and linked them to maintaining communal harmony and law and order during the month of Sawan. This report examines the Rampur SP controversial statement, viral video, official clarification, Uttar Pradesh Police response and claims regarding his retirement.



















