मौसम की मेहरबानी से मिली राहत बारुद की गंध में गंवाई, एनसीआर के सभी प्रमुख शहरों में एक्यूआई 300 के पार

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बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए. सुप्रीम कोर्ट ने पटाखो पर ब्रेन लगा दिया था. लेकिन कोर्ट के पाबंदी के बावजूद भी दिवाली के दिन आतिशबाजी से दिल्ली- एनसीआर समेत देशभर में वायु प्रदूषण का ग्राफ तेजी से बढ़ा. वही आपको बता दे राष्ट्रीय राजधानी से लेकर कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और लखनऊ तक में हवा की गुणवत्ता बहुत ही खराब श्रेणी में पहुंच गई.  बता दे आपको दो दिन पहले हुई बारिश की मेहरबानी से आठ साल बाद दिल्ली में दिवाली के दिन हवा की गुणवत्ता सर्वोत्तम श्रेणी में पहुंची थी, जो रविवार देर रात तक हुई आतिशबाजी में धुआं- धुआं हो गई। दिल्ली के कुछ इलाकों में तो एक्यूआई 400 के पार तक चला गया था, जो अत्यधिक गंभीर श्रेणी में आता है और एक्यूआई के बढ़ने से लोगो  को सांस लेने में काफी ज्यादा दिक्कत का सामना करना पढ़ता है वहीं, दिवाली के बाद पैदा हुई वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति ने दिल्ली के साथ ही मुंबई और कोलकाता को दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में पहुंचा दिया।

आतिशबाजी के चलते लुटियन दिल्ली से लेकर बाहरी दिल्ली तक हवा में धुएं की घनी चादर फैल गई। सड़क किनारे पटाखों से निकलने वाला कचरा जमा हो गया। यह हाल तब था, जब सुप्रीम कोर्ट के साथ हीदिल्ली सरकार ने पटाखों को जलाने पर पूरी तरह से रोक लगाई थी और दीया जलाओ, पटाखा नहीं, अभियान चलाया था। राजधानी दिल्ली के साथ ही एनसीआर के इलाकों में भी देर रात तक लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। तेज आवाज वाले और बहुत खतरनाक बम भी छोड़े गए। हालाकि सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर ब्रेन लगाए थे लेकिन लोग नही माने और अधिक से अधिक पटाखें फोड़े और फिर दिवाली के अगले दिन सोमवार को शाम 4 बजे दिल्ली में एक्यूआई 358 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी में है। एक दिन पहले यानी दिवाली के दिन शाम चार बजे यह 218 पर था। राष्ट्रीय राजधानी और गाजियाबाद में एक्यूआईल 329 के पार था वही नोएडा में 363, ग्रेटर नोएडा में 342 दर्ज किया गया है वहीं बता दे आपको फरीदाबाद में यह 370 और गुरुग्राम में 349 रहा. जानकारी के अनुसार आपको बता दे कि अगर एक्युआई 300 से ऊपर होता है तो वह काफी ज्यादा खराब श्रेणी में माना जाता है.

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