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‘RSS शैतान, BJP उसकी परछाई’ — कर्नाटक मंत्री प्रियांक खरगे के बयान से गरमाई सियासत, लगाए गंभीर आरोप

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AIN NEWS 1 | देश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर हलचल तेज हो गई है। कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लेकर तीखा बयान देते हुए बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक बहस छिड़ गई है।

खरगे ने RSS को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए, जिसमें संगठन की भूमिका, फंडिंग स्रोत, राजनीतिक प्रभाव और सामाजिक मुद्दों पर उसकी विचारधारा को लेकर सवाल उठाए गए। उनके बयान को विपक्षी राजनीति की आक्रामक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जबकि बीजेपी और संघ समर्थकों ने इसे राजनीतिक हमला बताया है।

बयान जिसने बढ़ाया राजनीतिक तापमान

एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान प्रियांक खरगे ने कहा कि RSS एक “शैतान संगठन” है और BJP उसकी “परछाई” की तरह काम करती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राजनीतिक लड़ाई BJP से नहीं, बल्कि उस विचारधारा से है जिसे RSS आगे बढ़ाता है।

उनका कहना था कि अगर राजनीतिक स्तर पर RSS की भूमिका खत्म हो जाए, तो BJP की स्थिति काफी कमजोर हो जाएगी। उन्होंने दावा किया कि RSS के समर्थन के बिना BJP का राष्ट्रीय प्रभाव काफी कम हो सकता है और वह एक क्षेत्रीय पार्टी के स्तर तक सिमट सकती है।

खरगे ने जनता दल (सेक्युलर) को भी सलाह देते हुए कहा कि पार्टी को अपने नाम से “सेक्युलर” शब्द हटाने पर विचार करना चाहिए।

RSS की फंडिंग को लेकर लगाए आरोप

अपने बयान में प्रियांक खरगे ने RSS की आर्थिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन के पीछे एक बड़ा वित्तीय नेटवर्क काम कर रहा है, जिसमें कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।

खरगे के अनुसार, RSS से जुड़े करीब 2500 से अधिक संगठन विभिन्न देशों में सक्रिय हैं और विदेशों से धन जुटाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि इतनी बड़ी राशि कहां से आती है और उसका उपयोग कैसे किया जाता है।

हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उन्होंने जांच की मांग दोहराई।

‘गुरु दक्षिणा’ पर उठाए सवाल

खरगे ने RSS द्वारा बताए जाने वाले “गुरु दक्षिणा” मॉडल पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब संगठन से फंडिंग के स्रोत के बारे में पूछा जाता है तो “गुरु दक्षिणा” का हवाला दिया जाता है।

उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अगर कोई व्यक्ति अलग झंडा लगाकर पैसे इकट्ठा करे तो क्या उसे भी वैध माना जाएगा। उनके अनुसार, किसी भी संगठन को पारदर्शिता के साथ अपनी वित्तीय व्यवस्था सार्वजनिक करनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जब तक RSS संविधान और कानून के तहत आधिकारिक रूप से पंजीकृत नहीं हो जाता, तब तक वह इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।

संगठन के रजिस्ट्रेशन की मांग

प्रियांक खरगे ने कहा कि RSS खुद को “बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स” बताकर औपचारिक रजिस्ट्रेशन से बचता है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी बड़े संगठन को कानूनी ढांचे के भीतर आना चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए एक दिन RSS को रजिस्टर करवाया जाएगा। उनके अनुसार, कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी संस्था को इससे बाहर नहीं रखा जा सकता।

धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर भी टिप्पणी

अपने बयान में खरगे ने धार्मिक विमर्श और समाज में बढ़ती ध्रुवीकरण की राजनीति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर हिंसा को बढ़ावा देना गलत है और कोई भी धर्म लोगों को संघर्ष या नफरत नहीं सिखाता।

उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या समय के साथ बदलती रही है और नेताओं को जिम्मेदारी के साथ बयान देने चाहिए।

RSS प्रमुख मोहन भागवत के कुछ बयानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक मुद्दों पर सलाह देने वाले नेताओं को खुद भी उदाहरण पेश करना चाहिए।

गरीबों को हिंसा की ओर धकेलने का आरोप

खरगे ने आरोप लगाया कि राजनीतिक और वैचारिक संगठनों द्वारा गरीब युवाओं को भावनात्मक मुद्दों के जरिए प्रभावित किया जाता है। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों को विकास और शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ाने के बजाय उन्हें संघर्ष की राजनीति में शामिल किया जा रहा है।

उनका कहना था कि देश को आगे बढ़ाने के लिए सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता देना जरूरी है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और बढ़ती बहस

खरगे के बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। बीजेपी नेताओं ने उनके आरोपों को निराधार और राजनीतिक लाभ के लिए दिया गया बयान बताया। वहीं कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि यह विचारधारा पर आधारित राजनीतिक बहस का हिस्सा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे बयान आगामी चुनावी माहौल में वैचारिक ध्रुवीकरण को और तेज कर सकते हैं।

भारतीय राजनीति में RSS की भूमिका

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश का एक बड़ा सामाजिक और वैचारिक संगठन माना जाता है, जिसकी स्थापना 1925 में हुई थी। वर्षों से संघ सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी गतिविधियों से जुड़ा रहा है। बीजेपी के कई नेता संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े रहे हैं, जिससे दोनों संगठनों के रिश्तों पर अक्सर राजनीतिक चर्चा होती रही है।

इसी वजह से विपक्षी दल समय-समय पर संघ की भूमिका और प्रभाव पर सवाल उठाते रहे हैं।

राजनीतिक विमर्श या विवाद?

विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतंत्र में विचारधाराओं पर बहस स्वाभाविक है, लेकिन शब्दों के चयन का असर राजनीतिक और सामाजिक माहौल पर पड़ता है। इस तरह के बयान जहां समर्थकों को ऊर्जा देते हैं, वहीं विरोधियों की प्रतिक्रिया भी तेज कर देते हैं।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राजनीतिक मंचों पर भी उठ सकता है।

प्रियांक खरगे के बयान ने एक बार फिर RSS और BJP को लेकर राजनीतिक बहस को केंद्र में ला दिया है। आरोप, जवाब और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच यह स्पष्ट है कि देश की राजनीति में वैचारिक संघर्ष अभी भी प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।

अब देखना होगा कि यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या आगे राजनीतिक और कानूनी स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता है।

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