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सेलम डिवीजन में महिला लोको पायलट से छेड़खानी का आरोप, जांच और कार्रवाई पर उठे सवाल!

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AIN NEWS 1: दक्षिण रेलवे के सेलम डिवीजन से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने रेलवे कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक महिला असिस्टेंट लोको पायलट ने अपने ही विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी, चीफ लोको इंस्पेक्टर, पर यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया है।

पीड़िता के मुताबिक, यह घटना उस समय हुई जब वह ड्यूटी के दौरान अकेली थी। महिला ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारी ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए उसके साथ ‘बैड टच’ किया और अनुचित तरीके से व्यवहार किया। इस घटना के बाद महिला मानसिक रूप से काफी परेशान हो गई और उसने हिम्मत जुटाकर इसकी शिकायत दर्ज कराई।

 क्या है पूरा मामला?

महिला असिस्टेंट लोको पायलट ने बताया कि यह कोई एक बार की घटना नहीं थी, बल्कि आरोपी अधिकारी का व्यवहार पहले से ही संदिग्ध और असहज करने वाला था। हालांकि, उसने शुरुआत में इसे नजरअंदाज किया, लेकिन जब सीमा पार हो गई तो उसने शिकायत दर्ज कराने का फैसला लिया।

महिला ने अपनी शिकायत दक्षिण रेलवे की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के पास दर्ज कराई। यह समिति कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न के मामलों की जांच के लिए बनाई जाती है।

ICC जांच और विवाद

पीड़िता का कहना है कि ICC की जांच में आरोपी अधिकारी के खिलाफ आरोप सही पाए गए। इसके बावजूद, उसे उम्मीद के मुताबिक सख्त कार्रवाई नहीं मिली। महिला का आरोप है कि आरोपी को सिर्फ हल्की सजा देकर छोड़ दिया गया, जो इस गंभीर मामले के लिए पर्याप्त नहीं है।

इस फैसले से असंतुष्ट महिला ने उच्च अधिकारियों से न्याय की मांग की है। उसका कहना है कि अगर ऐसे मामलों में सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इससे गलत संदेश जाएगा और अन्य पीड़ित महिलाएं शिकायत करने से डरेंगी।

रेलवे प्रशासन पर उठे सवाल

इस मामले के सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जब जांच में आरोप साबित हो चुके हैं, तो फिर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है, ताकि कार्यस्थल सुरक्षित बन सके और महिलाओं का भरोसा बना रहे। केवल औपचारिक कार्रवाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा।

महिला सुरक्षा कानून और जिम्मेदारी

भारत में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए “POSH Act” (Prevention of Sexual Harassment Act, 2013) लागू है। इसके तहत हर संस्था में ICC बनाना अनिवार्य है और शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच करना जरूरी होता है।

लेकिन इस मामले ने यह दिखाया है कि केवल कानून बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसका सही तरीके से पालन भी उतना ही जरूरी है।

मानसिक और सामाजिक प्रभाव

ऐसी घटनाओं का असर सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी गहरा होता है। पीड़ित महिला ने बताया कि इस घटना के बाद वह काफी तनाव में रही और काम करने में भी उसे असहज महसूस हुआ।

कार्यस्थल पर सुरक्षा की कमी से न केवल पीड़ित बल्कि अन्य महिला कर्मचारी भी डर और असुरक्षा महसूस करती हैं।

 आगे क्या?

अब यह मामला उच्च स्तर पर पहुंच चुका है और उम्मीद की जा रही है कि रेलवे प्रशासन इस पर दोबारा गंभीरता से विचार करेगा। महिला ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उसे न्याय चाहिए और वह तब तक पीछे नहीं हटेगी जब तक उचित कार्रवाई नहीं होती।

A serious workplace harassment case has emerged from the Salem Division of Southern Railway, where a woman assistant loco pilot accused a senior loco inspector of inappropriate behavior and sexual misconduct. Despite the Internal Complaints Committee (ICC) reportedly confirming the allegations, the lack of strict disciplinary action has raised concerns about the implementation of the POSH Act and workplace safety in Indian Railways. This incident highlights the urgent need for stronger accountability, employee protection, and transparent investigation processes in government sectors.

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