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दुविधा छोड़ आत्मविश्वास अपनाएं: नागपुर में मोहन भागवत ने कहा—भारत का ‘विश्व गुरु’ बनना तय!

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AIN NEWS 1: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने Nagpur में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान भारत के भविष्य को लेकर एक बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश को अब “होगा या नहीं होगा” जैसी मानसिक दुविधा से बाहर निकलना होगा और पूरे विश्वास के साथ आगे बढ़ना होगा, क्योंकि भारत का ‘विश्व गुरु’ बनना सिर्फ एक सपना नहीं बल्कि एक निश्चित दिशा है।

🔶 आत्मविश्वास ही आगे बढ़ने की कुंजी

अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि अक्सर समाज में यह सवाल उठता है कि क्या भारत सच में दुनिया का नेतृत्व कर पाएगा। इस पर उन्होंने साफ कहा कि यह समय संदेह करने का नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब समाज अपने सामर्थ्य को पहचानता है, तभी बड़े लक्ष्य हासिल होते हैं।

उनका कहना था कि भारत के पास वह सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक पूंजी है, जो उसे वैश्विक स्तर पर मार्गदर्शक बना सकती है। जरूरत सिर्फ इस बात की है कि देशवासी अपने अंदर की शक्ति को पहचानें और एकजुट होकर काम करें।

🔶 राम मंदिर संघर्ष का उदाहरण

भागवत ने अपने भाषण में Ram Mandir Ayodhya के निर्माण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक मंदिर का निर्माण नहीं था, बल्कि यह लंबे संघर्ष, धैर्य और समाज की आस्था का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि वर्षों तक चले इस आंदोलन में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन समाज ने हार नहीं मानी। अंततः वही हुआ, जिस पर लोगों को विश्वास था। उन्होंने इसे इस बात का उदाहरण बताया कि यदि समाज ठान ले, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता।

🔶 समाज की भूमिका सबसे अहम

भागवत ने यह भी कहा कि देश का भविष्य सिर्फ सरकारों से तय नहीं होता, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी से बनता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जिम्मेदारी निभाएं और देश निर्माण में योगदान दें।

उनका मानना है कि जब हर नागरिक अपने कर्तव्यों को समझकर कार्य करता है, तो राष्ट्र स्वतः मजबूत होता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता और सामाजिक एकता में है।

🔶 ‘विश्व गुरु’ बनने का अर्थ क्या है?

अपने संबोधन में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘विश्व गुरु’ बनने का मतलब किसी पर प्रभुत्व जमाना नहीं है। इसका असली अर्थ है—दुनिया को सही दिशा दिखाना, मानवता के लिए मार्गदर्शन देना और शांति व संतुलन का संदेश फैलाना।

उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा हमेशा से “वसुधैव कुटुंबकम्” की रही है, यानी पूरी दुनिया एक परिवार है। इसी सोच के साथ भारत दुनिया को जोड़ने का काम कर सकता है।

🔶 युवा शक्ति पर भरोसा

भागवत ने देश के युवाओं को लेकर भी विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि आज का युवा जागरूक है, तकनीकी रूप से सक्षम है और बदलाव लाने की क्षमता रखता है। अगर युवा सही दिशा में प्रयास करें, तो भारत का भविष्य और भी उज्ज्वल हो सकता है।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने कौशल को सिर्फ व्यक्तिगत लाभ तक सीमित न रखें, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान दें।

🔶 चुनौतियों से घबराने की जरूरत नहीं

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि देश के सामने कई चुनौतियां हैं—चाहे वह सामाजिक हों, आर्थिक हों या वैश्विक स्तर की समस्याएं। लेकिन उन्होंने कहा कि इनसे डरने की जरूरत नहीं है।

उनका कहना था कि हर बड़ी उपलब्धि के रास्ते में कठिनाइयाँ आती हैं, लेकिन जो समाज उनका सामना करता है, वही आगे बढ़ता है। भारत ने इतिहास में कई कठिन दौर देखे हैं और हर बार मजबूत होकर उभरा है।

🔶 सकारात्मक सोच का संदेश

भागवत ने अपने भाषण का सार यही बताया कि देश को सकारात्मक सोच अपनानी होगी। उन्होंने कहा कि नकारात्मकता और संदेह हमें पीछे खींचते हैं, जबकि विश्वास और एकजुटता हमें आगे बढ़ाते हैं।

उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने भीतर आत्मविश्वास जगाएं और यह मानकर चलें कि भारत निश्चित रूप से दुनिया में एक महत्वपूर्ण और मार्गदर्शक भूमिका निभाएगा।

RSS chief Mohan Bhagwat, speaking in Nagpur, highlighted India’s potential to become a Vishwaguru and urged citizens to move beyond doubt and embrace confidence. Referring to the Ram Mandir movement as an example of collective determination, he emphasized unity, cultural strength, and social responsibility as key factors in India’s rise as a global leader.

 

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