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26 साल बाद पकड़ा गया ‘सलीम वास्तिक’: पहचान बदलकर जी रहा था फरार कातिल, अब खुली पूरी सच्चाई!

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AIN NEWS 1: गाजियाबाद से हाल ही में हुई सलीम वास्तिक की गिरफ्तारी ने एक ऐसे मामले की परतें खोल दी हैं, जो करीब 26 साल से दबा हुआ था। जिस शख्स को कुछ समय पहले तक एक हमले का पीड़ित मानकर सहानुभूति मिल रही थी, वही अब एक पुराने जघन्य अपराध का दोषी निकला है।

यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं, बल्कि पहचान बदलकर कानून से बचने की लंबी कोशिश, चालाकी और अंततः न्याय तक पहुंचने की है।

1995: जब शुरू हुई यह खौफनाक कहानी

यह मामला 20 जनवरी 1995 का है। दिल्ली के दरियागंज इलाके में रहने वाले कारोबारी सीताराम का 13 साल का बेटा संदीप रोज की तरह स्कूल के लिए घर से निकला, लेकिन उस दिन वह वापस नहीं लौटा।

परिवार ने काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन एक फोन कॉल आया, जिसने परिवार को हिला कर रख दिया। कॉल करने वाले ने बताया कि संदीप का अपहरण कर लिया गया है और उसे वापस पाने के लिए 30 हजार रुपये की मांग की गई।

फिरौती की साजिश और हत्या

अपहरणकर्ताओं ने पैसे देने का तरीका भी बताया—गाजियाबाद के लोनी इलाके में एक बस में रकम रखनी थी। लेकिन इस बीच पुलिस जांच में जुट गई।

जांच के दौरान शक स्कूल के मार्शल आर्ट ट्रेनर सलीम खान पर गया। एक गवाह ने बताया कि उसने बच्चे को “मास्टरजी” कहे जाने वाले व्यक्ति के साथ जाते देखा था।

पुलिस ने सलीम को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो उसने अपने साथी अनिल के साथ मिलकर अपहरण और हत्या की बात कबूल कर ली।

संदीप की हत्या कर उसका शव मुस्तफाबाद इलाके के एक नाले के पास फेंक दिया गया था। बाद में पुलिस ने शव बरामद किया और परिवार ने पहचान की।

1997: कोर्ट का फैसला

मामले की सुनवाई के बाद 5 अगस्त 1997 को दिल्ली की अदालत ने सलीम खान और उसके साथी अनिल को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

दोनों ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन सजा बरकरार रही।

2000: पैरोल और फरारी

साल 2000 में सलीम को पैरोल पर जेल से बाहर आने का मौका मिला। लेकिन वह वापस नहीं लौटा और फरार हो गया।

यहीं से शुरू हुई उसकी पहचान बदलने और पुलिस से बचने की लंबी कहानी।

पहचान बदलकर नई जिंदगी

फरार होने के बाद सलीम ने सबसे पहले अपना नाम बदल दिया। उसने अपने नाम से “खान” हटाकर “वास्तिक” जोड़ लिया।

हरियाणा के करनाल में कारपेंटर का काम सीखा

अंबाला में भी इसी काम में लगा रहा

करीब 10 साल बाद गाजियाबाद के लोनी इलाके में बस गया

यहां उसने महिलाओं के कपड़ों की दुकान खोली

धीरे-धीरे उसने खुद को एक आम नागरिक की तरह स्थापित कर लिया। इतना ही नहीं, वह सोशल मीडिया और यूट्यूब पर भी सक्रिय हो गया।

सोशल मीडिया पर नई पहचान

सलीम वास्तिक के नाम से वह यूट्यूब पर वीडियो बनाने लगा और टीवी डिबेट में भी शामिल होने लगा।

उसने अपने पुराने जीवन को पूरी तरह छिपा लिया और ऐसा दिखाया जैसे वह एक सामान्य व्यक्ति हो।

2026: एक हमले से बदली कहानी

फरवरी 2026 में सलीम पर जानलेवा हमला हुआ। दो हमलावरों ने उस पर चाकू से कई वार किए और गला रेतने की कोशिश की।

इस घटना के बाद सलीम को लेकर काफी सहानुभूति बनी और मामला चर्चा में आ गया।

पुलिस ने इस हमले के आरोपियों को एनकाउंटर में मार गिराया।

सच्चाई सामने आने की शुरुआत

हमले के बाद जब सलीम चर्चा में आया, तो पुलिस की नजर उस पर पड़ी। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने पुराने रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए।

फिंगरप्रिंट, फोटो और अन्य सबूतों के आधार पर यह पुष्टि हुई कि सलीम वास्तिक वही सलीम खान है, जो 1995 के अपहरण और हत्या मामले में दोषी था और फरार चल रहा था।

25 अप्रैल 2026: आखिरकार गिरफ्तारी

काफी समय तक निगरानी और गुप्त जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने गाजियाबाद के लोनी इलाके से सलीम को गिरफ्तार कर लिया।

इस गिरफ्तारी में पुलिस की एक विशेष टीम और हेड कांस्टेबल की अहम भूमिका रही।

 पूरे मामले को 10 पॉइंट में समझें

1995 में 13 साल के बच्चे का अपहरण हुआ

फिरौती की मांग की गई

बच्चे की हत्या कर दी गई

सलीम और अनिल गिरफ्तार हुए

1997 में उम्रकैद की सजा मिली

2000 में पैरोल पर बाहर आकर फरार हो गया

नाम बदलकर नई पहचान बनाई

हरियाणा और यूपी में छिपता रहा

गाजियाबाद में दुकान और यूट्यूब चैनल चलाया

2026 में आखिरकार गिरफ्तार हुआ

 क्या बताता है यह मामला?

यह केस दिखाता है कि अपराधी कितनी भी चालाकी से अपनी पहचान बदल ले, लेकिन कानून से हमेशा नहीं बच सकता।

26 साल तक फरार रहने के बावजूद सलीम को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया।

The shocking arrest of Salim Vastik, also known as Salim Khan, in Ghaziabad has revived a decades-old 1995 kidnapping and murder case. After evading law enforcement for 26 years by changing his identity and relocating across Haryana and Uttar Pradesh, the fugitive was finally captured by the Delhi Crime Branch. This case highlights how criminals can attempt to escape justice but are eventually tracked down through advanced investigation techniques, making it a significant development in India’s crime history.

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