spot_imgspot_img

विधायकों के फोन नहीं उठाने वाले अधिकारियों पर सख्त होंगे विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना!

spot_img

Date:

AIN NEWS 1: सतीश महाना ने एक बार फिर साफ संकेत दे दिया है कि अब जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के लिए मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा में हाल ही में उठे एक अहम मुद्दे पर उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि यदि कोई अधिकारी विधायकों के फोन कॉल्स को नजरअंदाज करता है या जनहित से जुड़े मामलों में सहयोग नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सेवा नियमावली के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला तब सामने आया जब सदन में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने अधिकारियों के असहयोग का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि कई बार जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों से संपर्क करना पड़ता है, लेकिन कुछ अधिकारी न तो फोन उठाते हैं और न ही समय पर जवाब देते हैं। इससे जनता के काम प्रभावित होते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

सदन में उठी चिंता के बाद अध्यक्ष का कड़ा रुख

नेता प्रतिपक्ष द्वारा उठाए गए इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की बात सुनना और जनहित से जुड़े मामलों में सहयोग करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इस संबंध में पहले से ही शासनादेश जारी हैं, जिनका पालन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।

अध्यक्ष ने संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना को निर्देश दिए कि वे सभी संबंधित विभागों को इस विषय में स्पष्ट रूप से अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि विधायक जब भी अपने क्षेत्र से जुड़े किसी जनहित के मुद्दे पर अधिकारियों से संपर्क करें, तो उन्हें समय पर जवाब और उचित सहयोग मिले।

सेवा नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

सतीश महाना ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो अधिकारी विधायकों के फोन नहीं उठाते या उनके द्वारा उठाए गए जनहित के मामलों को गंभीरता से नहीं लेते, वे सीधे तौर पर अपनी सेवा नियमावली का उल्लंघन कर रहे हैं। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से उठाए गए मुद्दों का समय पर समाधान हो सके। यदि अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करेंगे, तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

अध्यक्ष ने यह भी याद दिलाया कि यह कोई पहला मामला नहीं है जब इस तरह की शिकायतें सामने आई हों। इससे पहले भी सदन में अधिकारियों के असहयोग से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया गया था और दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।

उन्होंने दोहराया कि जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का सम्मान करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

लोकतंत्र के तीनों स्तंभों में संतुलन जरूरी

अपने संबोधन के दौरान सतीश महाना ने कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के ये तीनों स्तंभ एक-दूसरे के पूरक हैं और सुचारु शासन व्यवस्था के लिए सभी को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र का सम्मान करना अनिवार्य है।

उन्होंने अधिकारियों को अपने कर्तव्यों और सीमाओं का पालन करने की सलाह दी। साथ ही सदन के सदस्यों से भी अपेक्षा जताई कि वे अन्य संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और मर्यादा बनाए रखें।

नए निर्देश जारी करने की तैयारी

विधानसभा अध्यक्ष ने संसदीय कार्य मंत्री से यह भी आग्रह किया कि इस विषय में आवश्यक होने पर नए और अधिक कड़े निर्देश जारी किए जाएं। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासनादेशों का प्रभावी अनुपालन हो और किसी भी स्तर पर जनप्रतिनिधियों की अनदेखी न की जाए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कोई अधिकारी इन निर्देशों की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ सेवा नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सतीश महाना का यह सख्त रुख इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय से ही जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान संभव है। ऐसे में यह निर्देश शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

UP Assembly Speaker Satish Mahana has issued a strict warning against government officials who ignore calls from MLAs or fail to cooperate in public welfare matters. The issue was raised by Leader of Opposition Mata Prasad Pandey in the Uttar Pradesh Assembly, following which Parliamentary Affairs Minister Suresh Khanna was directed to ensure compliance with governance protocols. The move aims to strengthen legislative accountability, improve coordination between elected representatives and administrative officers, and ensure timely resolution of public grievances in Uttar Pradesh governance.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
broken clouds
30.1 ° C
30.1 °
30.1 °
89 %
1kmh
73 %
Thu
32 °
Fri
35 °
Sat
36 °
Sun
34 °
Mon
34 °
Video thumbnail
Rahul Gandhi का ज़ोरदार हमला बोले - “इनको हम पागल कर देंगे” | Congress
23:44
Video thumbnail
Rahul Gandhi on PM Modi's Foreign Policy | मोदी की विदेश नीति पर राहुल गांधी का तंज
00:14
Video thumbnail
मोदी की विदेश नीति पर राहुल गांधी का तंज
00:14
Video thumbnail
PM मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते?राहुल गांधी ने बताई वजह
00:45
Video thumbnail
Rahul Gandhi on Amit Shah : "अमित शाह...वो भाग गया"
00:23
Video thumbnail
Rahul Gandhi : "इनको हम पागल कर देंगे..."
00:16
Video thumbnail
टोका-टाकी कर रहे थे कल्याण बनर्जी, फिर मजेदार अंदाज़ में आए Modi, ऐसे ली मौज, पूरा सदन हंसता रह गया!
11:16
Video thumbnail
संसद का मानसून सत्र खत्म! 12 बिल पास, सरकार बोली- विपक्ष ने रोकी चर्चा, विपक्ष का पलटवार
03:41
Video thumbnail
Dimple Yadav : "आजम खान जी पर गलत मुकदमों के तहत आज भी अन्याय हो रहा है।"
00:16
Video thumbnail
PGDCA Exam Cheating : राजस्थान के सीकर कॉलेज में सामूहिक नकल!
00:53

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related