संवेदनशील ऑनलाइन कंटेंट पर सरकार की बड़ी सख्ती: अब सिर्फ 2 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट
AIN NEWS 1: भारत सरकार ने इंटरनेट और सोशल मीडिया पर बढ़ते फर्जी, आपत्तिजनक और एआई से तैयार किए जा रहे कंटेंट पर लगाम कसने के लिए आईटी नियमों (Information Technology Rules, 2021) में बड़ा बदलाव किया है। नए संशोधनों के तहत अब सोशल मीडिया कंपनियों और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को संवेदनशील मामलों में शिकायत मिलने के बाद अधिकतम दो घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी।
सरकार का कहना है कि डिजिटल दुनिया में तेजी से बढ़ रहे डीपफेक वीडियो, फर्जी तस्वीरों, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट और गैर-सहमति से साझा की जाने वाली निजी तस्वीरों जैसी घटनाओं को रोकने के लिए यह कदम बेहद जरूरी था। नए नियमों का उद्देश्य इंटरनेट को अधिक सुरक्षित, जवाबदेह और पारदर्शी बनाना है।

क्या हैं नए नियम?
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा किए गए संशोधनों के अनुसार अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए विभिन्न प्रकार की शिकायतों पर कार्रवाई की समय-सीमा पहले की तुलना में काफी कम कर दी गई है।
1. संवेदनशील मामलों में सिर्फ 2 घंटे की समय-सीमा
यदि शिकायत किसी महिला की निजी तस्वीर, गैर-सहमति से साझा किए गए वीडियो, नग्नता, गलत पहचान, यौन शोषण या अन्य अत्यधिक संवेदनशील सामग्री से जुड़ी है, तो संबंधित प्लेटफॉर्म को अधिकतम दो घंटे के भीतर कंटेंट हटाने या उस पर आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।
पहले इस तरह की शिकायतों के समाधान के लिए 24 घंटे तक का समय दिया जाता था।
2. गैर-कानूनी कंटेंट हटाने की नई समय-सीमा
यदि सरकार या किसी सक्षम अदालत की ओर से किसी कंटेंट को गैर-कानूनी घोषित करते हुए हटाने का आदेश दिया जाता है, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अब तीन घंटे के भीतर उस कंटेंट को हटाना होगा।
पहले इसके लिए 36 घंटे का समय निर्धारित था।
3. सामान्य शिकायतों का भी जल्दी होगा समाधान
अब सामान्य शिकायतों के निस्तारण की समय-सीमा भी घटा दी गई है।
पहले – 72 घंटे
अब – 36 घंटे
इस बदलाव का उद्देश्य लोगों को समय पर न्याय दिलाना और ऑनलाइन शिकायतों का तेजी से समाधान सुनिश्चित करना है।
AI और Deepfake पर सरकार की विशेष नजर
पिछले कुछ वर्षों में एआई (Artificial Intelligence) आधारित डीपफेक वीडियो और तस्वीरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कई मामलों में लोगों की छवि खराब करने, धोखाधड़ी करने और गलत सूचना फैलाने के लिए डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
इसी को देखते हुए सरकार ने नए नियमों में एआई से तैयार कंटेंट पर भी विशेष प्रावधान जोड़े हैं।
अब सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई से तैयार किए गए कंटेंट की स्पष्ट पहचान हो और उपयोगकर्ताओं को भ्रमित न किया जाए। ऐसे कंटेंट पर उचित लेबल लगाने और गलत सूचना रोकने की जिम्मेदारी भी प्लेटफॉर्म की होगी।
किन प्लेटफॉर्म पर लागू होंगे ये नियम?
ये नियम विशेष रूप से उन बड़े सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लागू होंगे जिनके भारत में 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं।
इनमें प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियां, वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म और बड़े डिजिटल इंटरमीडियरी शामिल हैं।
ऑटोमेटेड तकनीक का इस्तेमाल होगा अनिवार्य
सरकार ने कहा है कि बड़े प्लेटफॉर्म को आधुनिक तकनीक और ऑटोमेटेड टूल्स का उपयोग करना होगा ताकि निम्न प्रकार के कंटेंट की पहचान तुरंत की जा सके—
बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री
दुष्कर्म या यौन हिंसा दर्शाने वाले वीडियो
पहले हटाए जा चुके समान कंटेंट
अन्य गंभीर गैर-कानूनी डिजिटल सामग्री
इससे ऐसे कंटेंट को वायरल होने से पहले ही रोका जा सकेगा।
नियम नहीं मानने पर क्या होगी कार्रवाई?
यदि कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत मिलने वाला ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) संरक्षण नहीं मिलेगा।
इसका अर्थ है कि प्लेटफॉर्म अपने यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कानूनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकेगा और उसके खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रावधान सोशल मीडिया कंपनियों को अधिक जिम्मेदार बनाएगा।
सरकार ने बदलाव क्यों किए?
सरकार का कहना है कि इंटरनेट पर फर्जी खबरों, डीपफेक वीडियो, महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध, ऑनलाइन उत्पीड़न और बच्चों से जुड़े अपराधों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
इन चुनौतियों से निपटने और नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फरवरी 2026 में आईटी नियमों में संशोधन किए गए। इन संशोधनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपत्तिजनक या गैर-कानूनी कंटेंट पर तेजी से कार्रवाई हो और पीड़ितों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
विशेषज्ञों की क्या राय है?
साइबर कानून विशेषज्ञों का मानना है कि नई समय-सीमा ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि प्लेटफॉर्म को तेज कार्रवाई के साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष समीक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना होगा ताकि वैध और सार्वजनिक हित से जुड़े कंटेंट पर अनावश्यक कार्रवाई न हो।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
इन नियमों के लागू होने से सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को कई लाभ मिल सकते हैं—
फर्जी और आपत्तिजनक कंटेंट जल्दी हटेगा।
महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई होगी।
डीपफेक और एआई आधारित धोखाधड़ी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पहले से अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनेंगे।
भारत सरकार द्वारा आईटी नियम, 2021 में किए गए नए संशोधन डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं। संवेदनशील मामलों में कार्रवाई की समय-सीमा को 24 घंटे से घटाकर केवल 2 घंटे करना, सरकार या अदालत के आदेश पर गैर-कानूनी कंटेंट को 3 घंटे के भीतर हटाने का प्रावधान और डीपफेक व एआई आधारित सामग्री पर सख्त निगरानी जैसे कदम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़ाएंगे। आने वाले समय में इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन से इंटरनेट को अधिक सुरक्षित, जिम्मेदार और भरोसेमंद बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
India has strengthened its IT Rules 2026 by making it mandatory for major social media platforms to remove sensitive online content within two hours and illegal content within three hours after receiving valid government or court orders. The updated Information Technology Rules 2021 also introduce stricter compliance for AI-generated content, deepfake videos, child safety, and online abuse. These new regulations aim to improve online safety in India, increase social media accountability, protect users from cybercrime, and reinforce compliance under Section 79 Safe Harbour provisions. This move marks a significant step toward creating a safer and more transparent digital ecosystem.



















