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ब्रिटेन में बड़ा राजनीतिक भूचाल: प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने दिया इस्तीफा, एंडी बर्नहैम सबसे मजबूत दावेदार

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AIN NEWS 1 |  ब्रिटेन की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने प्रधानमंत्री पद और लेबर पार्टी के नेतृत्व से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर राष्ट्र को संबोधित करते हुए स्टार्मर ने कहा कि उन्हें महसूस हुआ है कि उनकी पार्टी अब यह नहीं मानती कि वह अगले आम चुनाव में लेबर पार्टी का सफल नेतृत्व कर सकते हैं। ऐसे में उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया है।

स्टार्मर का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब पिछले कई महीनों से लेबर पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा था। पार्टी के कई सांसद और वरिष्ठ नेता लगातार उनके फैसलों और नीतियों पर सवाल उठा रहे थे। हालिया स्थानीय चुनावों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन और सरकार की गिरती लोकप्रियता ने भी उनके ऊपर दबाव बढ़ा दिया था। अंततः उन्होंने पार्टी और सरकार के हित में पद छोड़ने का निर्णय लिया।

हालांकि स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि नए नेता के चुने जाने तक वह प्रधानमंत्री पद पर बने रहेंगे और सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करेंगे। उन्होंने अपने संभावित उत्तराधिकारी को पूरा सहयोग देने का भी आश्वासन दिया।

जुलाई के मध्य तक मिल सकता है नया प्रधानमंत्री

स्टार्मर ने बताया कि उन्होंने सोमवार सुबह ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय को अपने इस्तीफे की जानकारी दे दी है। अब लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC) नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगी।

जानकारी के अनुसार, 9 जुलाई से नेतृत्व चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। पार्टी की कोशिश है कि 17 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले नए नेता का चुनाव पूरा कर लिया जाए। यदि ऐसा होता है तो जुलाई के मध्य तक ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री मिल जाएगा।

ब्रिटेन की संसदीय व्यवस्था में जनता सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं करती। वहां मतदाता अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से सांसद चुनते हैं। जिस पार्टी को संसद में बहुमत प्राप्त होता है, उसी पार्टी का नेता प्रधानमंत्री बनता है। चूंकि इस समय लेबर पार्टी सत्ता में है, इसलिए पार्टी का नया नेता ही देश का अगला प्रधानमंत्री बनने की सबसे अधिक संभावना रखता है। इसके लिए नए आम चुनाव कराने की आवश्यकता नहीं होती।

एंडी बर्नहैम सबसे मजबूत दावेदार

स्टार्मर के इस्तीफे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा एंडी बर्नहैम के नाम की हो रही है। बीबीसी और अन्य राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बर्नहैम इस समय लेबर पार्टी के अगले नेता बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं।

हाल ही में मेकरफील्ड उपचुनाव में जीत हासिल कर संसद में वापसी करने वाले बर्नहैम को पार्टी के सांसदों के बड़े वर्ग का समर्थन प्राप्त है। उन्हें लेबर पार्टी के भीतर विभिन्न विचारधारात्मक समूहों के बीच स्वीकार्य नेता माना जाता है।

एंडी बर्नहैम ब्रिटिश राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वह पहले स्वास्थ्य मंत्री समेत कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर काम कर चुके हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने मैनचेस्टर क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई थी। उस समय आम लोगों के हितों के लिए संघर्ष करने वाले नेता के रूप में उनकी छवि मजबूत हुई थी।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यही कारण है कि आज भी उनकी लोकप्रियता पार्टी कार्यकर्ताओं और आम समर्थकों के बीच बनी हुई है। उपचुनाव में हालिया जीत के बाद उनकी स्थिति और मजबूत हुई है।

दो बार नेतृत्व चुनाव हार चुके हैं बर्नहैम

हालांकि बर्नहैम के राजनीतिक करियर में चुनौतियां भी रही हैं। वह इससे पहले दो बार लेबर पार्टी के नेतृत्व का चुनाव हार चुके हैं। वर्ष 2010 में उन्हें एड मिलिबैंड से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद 2015 में वह जेरेमी कॉर्बिन से चुनाव हार गए थे।

इसके बावजूद वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें सबसे मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार पार्टी के भीतर उनके पक्ष में माहौल पहले की तुलना में कहीं अधिक अनुकूल है।

हालांकि उनके आलोचकों का कहना है कि बर्नहैम समय-समय पर अपने राजनीतिक रुख बदलते रहे हैं, जिसके कारण यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि वह किन विचारों पर स्थायी रूप से कायम हैं। वहीं उनके समर्थक इसे उनकी व्यावहारिक राजनीति और विभिन्न गुटों को साथ लेकर चलने की क्षमता बताते हैं।

तीन अन्य बड़े नाम भी चर्चा में

हालांकि नेतृत्व की दौड़ केवल एंडी बर्नहैम तक सीमित नहीं है। लेबर पार्टी के भीतर कई अन्य वरिष्ठ नेताओं के नाम भी संभावित उम्मीदवारों के रूप में सामने आ रहे हैं।

इनमें सबसे प्रमुख नाम एंजेला रेनर का है, जो वर्तमान में लेबर पार्टी की उपनेता हैं। पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। वह लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं।

इसके अलावा यवेट कूपर को भी गंभीर दावेदार माना जा रहा है। वह पार्टी की अनुभवी नेता हैं और कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर काम कर चुकी हैं। उनकी प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक अनुभव उन्हें नेतृत्व की दौड़ में मजबूत बनाते हैं।

वहीं वेस स्ट्रीटिंग भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल हैं। उन्हें लेबर पार्टी की नई पीढ़ी का प्रमुख चेहरा माना जाता है। हाल के वर्षों में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है और युवा सांसदों के बीच उन्हें अच्छा समर्थन प्राप्त है।

हालांकि अभी तक किसी भी नेता ने औपचारिक रूप से अपनी उम्मीदवारी की घोषणा नहीं की है। ऐसे में आने वाले दिनों में नेतृत्व की दौड़ और दिलचस्प हो सकती है।

स्टार्मर पर क्यों बढ़ा दबाव

कीर स्टार्मर ने 2024 के आम चुनाव में लेबर पार्टी को बड़ी जीत दिलाई थी और लंबे समय बाद पार्टी को सत्ता में वापस लाने में सफलता हासिल की थी। लेकिन सरकार बनने के बाद उनकी लोकप्रियता धीरे-धीरे कम होती गई।

विश्लेषकों के अनुसार इसके पीछे कई कारण रहे। सरकार की कुछ नीतियों में बार-बार बदलाव, चुनावी वादों को पूरी तरह लागू न कर पाना और आम लोगों के जीवन स्तर में अपेक्षित सुधार न होना प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

बढ़ती आर्थिक चुनौतियों, सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव और कुछ विवादास्पद फैसलों ने भी सरकार की छवि को प्रभावित किया। इसके चलते पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता गया।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब एंडी बर्नहैम ने हालिया उपचुनाव में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। इस जीत को कई लोगों ने स्टार्मर के नेतृत्व के खिलाफ जनमत के रूप में देखा। इसके बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज हो गई।

ब्रिटेन को सात साल में छठा प्रधानमंत्री

स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ही ब्रिटेन एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता के दौर में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। यदि नया प्रधानमंत्री जुलाई में चुन लिया जाता है तो यह सात वर्षों में देश का छठा प्रधानमंत्री होगा।

2016 में ब्रेक्जिट जनमत संग्रह के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने इस्तीफा दिया था। उनके बाद थेरेसा मे प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन वह संसद से ब्रेक्जिट समझौता पारित नहीं करा सकीं और 2019 में पद छोड़ना पड़ा।

इसके बाद बोरिस जॉनसन प्रधानमंत्री बने, लेकिन कोविड लॉकडाउन के दौरान हुई पार्टियों और अन्य विवादों के कारण उन्हें 2022 में इस्तीफा देना पड़ा।

जॉनसन के बाद लिज ट्रस प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन उनकी आर्थिक नीतियों से वित्तीय बाजारों में भारी उथल-पुथल मच गई। वह केवल 49 दिनों तक ही पद पर रह सकीं और इस्तीफा देना पड़ा।

इसके बाद ऋषि सुनक प्रधानमंत्री बने। हालांकि बढ़ती महंगाई, आर्थिक दबाव और आम चुनाव में पार्टी की हार के बाद उन्हें भी पद छोड़ना पड़ा।

अब कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद ब्रिटेन को एक और नया प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है। लगातार नेतृत्व परिवर्तन ने ब्रिटिश राजनीति में स्थिरता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार क्यों बदलते हैं

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली है। यहां प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे जनता नहीं करती। प्रधानमंत्री का पद पार्टी के भीतर समर्थन पर निर्भर करता है।

जब तक सत्तारूढ़ दल के सांसद अपने नेता पर भरोसा बनाए रखते हैं, तब तक वह प्रधानमंत्री बने रहते हैं। लेकिन जैसे ही सांसदों को लगता है कि मौजूदा नेता अगले चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है, नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

ब्रिटेन की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के आंतरिक नियम भी नेतृत्व परिवर्तन को अपेक्षाकृत आसान बनाते हैं। यही कारण है कि वहां कई बार बिना आम चुनाव कराए भी प्रधानमंत्री बदल जाते हैं।

अब पूरी दुनिया की नजर लेबर पार्टी के नेतृत्व चुनाव पर टिकी है। आने वाले कुछ सप्ताह यह तय करेंगे कि ब्रिटेन की बागडोर किस नेता के हाथों में जाएगी और देश की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

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