spot_imgspot_img

ऐतिहासिक धरोहरों की बदहाल स्थिति पर हाई कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब!

spot_img

Date:

AIN NEWS 1 पवन कुमार तिवारी  :  एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जहां इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक धरोहरों की बिगड़ती हालत को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है। इस आदेश ने प्रदेश में धरोहर संरक्षण की स्थिति पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

 क्या है पूरा मामला?

यह मामला गाजियाबाद निवासी अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ द्वारा दाखिल की गई एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। याचिका में दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश में हजारों ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल आज भी असुरक्षित हैं और उनकी देखरेख की स्थिति बेहद खराब है।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने केंद्र और राज्य सरकार के अलावा कई एजेंसियों को नोटिस जारी किया है। इनमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), संस्कृति मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय और राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण शामिल हैं।

कोर्ट ने सभी पक्षों को अपना जवाब देने के लिए 8 सप्ताह का समय दिया है।

चौंकाने वाले आंकड़े

याचिका में प्रस्तुत आंकड़े काफी चिंताजनक हैं। इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) की रिपोर्ट के अनुसार:

उत्तर प्रदेश में कुल 5416 ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल हैं

इनमें से केवल 421 स्थल ही संरक्षित हैं

यानी 4995 स्मारक पूरी तरह असुरक्षित हैं

यह आंकड़े यह दिखाते हैं कि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर कितनी उपेक्षा का शिकार हो रही है।

असुरक्षित धरोहरों की हालत

याचिका में बताया गया है कि जिन स्मारकों को संरक्षित नहीं किया गया है, वहां कई तरह की समस्याएं देखने को मिल रही हैं:

अवैध कब्जा और अतिक्रमण

ऐतिहासिक संरचनाओं का तोड़ा जाना

स्मारकों का अन्य उपयोगों में बदलना

सुरक्षा और रखरखाव का अभाव

कई स्थानों पर तो हालत इतनी खराब है कि वहां मौजूद प्राचीन संरचनाओं के निशान तक मिट चुके हैं।

किन क्षेत्रों का हुआ जिक्र?

इस जनहित याचिका में प्रदेश के कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है, जैसे:

झांसी – यहां का प्रसिद्ध किला भी उपेक्षा का शिकार बताया गया है

वृंदावन – यमुना किनारे स्थित 48 घाट न तो सूचीबद्ध हैं और न ही संरक्षित

आगरा

लखनऊ

हस्तिनापुर

इन क्षेत्रों में कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं, जो पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

प्रमुख स्मारकों की हालत भी खराब

याचिका में कुछ प्रमुख स्मारकों की खराब स्थिति का भी जिक्र किया गया है:

झांसी का किला (रानी लक्ष्मीबाई से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल)

लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा

वृंदावन का राधा बल्लभ मंदिर

इन स्थलों की हालत भी संतोषजनक नहीं बताई गई है, जो कि गंभीर चिंता का विषय है।

राज्य सरकार पर आरोप

याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य पुरातत्व विभाग ने वर्ष 2011 के बाद से असुरक्षित स्मारकों की पहचान और सूची तैयार करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसके चलते कई ऐतिहासिक स्थल धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं।

यह आरोप सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।

याचिका में क्या मांगी गई है मांग?

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी करने की मांग की है:

प्रदेश के सभी ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों की पहचान की जाए

इनका सही तरीके से दस्तावेजीकरण (Documentation) किया जाए

सभी धरोहर स्थलों को संरक्षित किया जाए

हर स्मारक के लिए अलग से हेरिटेज उपनियम (Heritage Bylaws) बनाए जाएं

विस्तृत संरक्षण योजना तैयार की जाए

सुरक्षा के लिए पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति हो

चेतावनी संकेतक (Warning Signs) लगाए जाएं

एक “हेरिटेज संरक्षण एवं विकास बोर्ड” का गठन किया जाए

कोर्ट की सख्ती का क्या मतलब?

हाई कोर्ट का यह कदम इस बात का संकेत है कि अब धरोहर संरक्षण के मुद्दे को हल्के में नहीं लिया जाएगा। कोर्ट ने सरकारों और एजेंसियों से जवाब मांगकर यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें इस दिशा में ठोस कार्रवाई करनी होगी।

अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी ऐतिहासिक विरासत से वंचित हो सकती हैं।

क्यों जरूरी है धरोहर संरक्षण?

ऐतिहासिक धरोहरें सिर्फ इमारतें नहीं होतीं, बल्कि ये हमारी पहचान, संस्कृति और इतिहास का प्रतीक होती हैं। इनके संरक्षण से:

पर्यटन को बढ़ावा मिलता है

स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है

आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से जुड़ने का मौका मिलता है

उत्तर प्रदेश में हजारों ऐतिहासिक धरोहरों की अनदेखी अब एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्ती से उम्मीद है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां अब इस दिशा में गंभीरता से काम करेंगी।

आने वाले 8 सप्ताह में सरकार का जवाब यह तय करेगा कि प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों का भविष्य कैसा होगा।

The Allahabad High Court has raised serious concerns over the deteriorating condition of historical monuments in Uttar Pradesh. According to reports by INTACH, more than 4995 heritage sites remain unprotected, leading to encroachment and destruction. The court has issued notices to the Archaeological Survey of India (ASI), central and state governments, and the National Monuments Authority, seeking accountability and action for heritage conservation in India.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
haze
34.1 ° C
34.1 °
34.1 °
22 %
2.6kmh
20 %
Thu
35 °
Fri
35 °
Sat
36 °
Sun
38 °
Mon
35 °
Video thumbnail
चुनावी मंच पर ममता बनर्जी का फोक डांस वायरल
00:58
Video thumbnail
मोदी हुए सरेंडर” नारे के साथ AAP का बड़ा हमला
00:54
Video thumbnail
Supreme Court Conversion Law: धर्म परिवर्तन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला | Muslism | Breaking
09:38
Video thumbnail
UGC Bill Controversy : UGC के समर्थन में आए हरियाणा के जाट, चंद्रशेखर रावण को दिया समर्थन !
10:40
Video thumbnail
संसद में Anurag Thakur का गर्दा फाड़ भाषण, Rahul को बनाया 'विकलांग', भागी Priyanka Gandhi !
17:31
Video thumbnail
UGC Bill के समर्थन में बोले हनुमान बेनीवाल, चंद्रशेखर रावण के साथ दिल्ली कूच का ऐलान !
13:31
Video thumbnail
Gurugram Rape Case: SC वकील का बड़ा खुलासा, पुलिस पर उठे गंभीर सवाल !
14:08
Video thumbnail
UGC बिल के समर्थन में क्या बोले चंद्रशेखर रावण, जाटों ने भी दे दिया समर्थन
20:36
Video thumbnail
4 लड़कियां, पूरा कोच परेशान!Delhi Metro में हंगामा, वीडियो वायरल
00:51
Video thumbnail
कांग्रेस का ऐतिहासिक ठिकाना खतरे में!क्या 24 अकबर रोड छिन जाएगा? जानिए पूरी कहानी
00:57

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related

मोनालिसा-फरमान शादी विवाद: नाबालिग होने के आरोप के बीच SC-ST आयोग की जांच, क्या रद्द होगी शादी?

मोनालिसा-फरमान शादी विवाद: नाबालिग होने के आरोप के बीच...