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संभल में नेजा मेले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आयोजन की अनुमति पर लगी रोक!

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AIN NEWS 1: संभल जिले में हर साल आयोजित होने वाले “नेजा मेला” को लेकर इस बार कानूनी विवाद गहराता जा रहा है। सैयद सालार मसूद गाजी के नाम पर आयोजित किए जाने वाले इस पारंपरिक मेले की अनुमति को लेकर दायर याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को इस मामले में पहले निचली अदालत का रुख करने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

संभल में वर्षों से सैयद सालार मसूद गाजी के नाम पर “नेजा मेला” आयोजित किया जाता रहा है। यह आयोजन स्थानीय स्तर पर धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ माना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होते रहे हैं। हालांकि, पिछले साल पहली बार प्रशासन ने इस मेले के आयोजन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

पुलिस प्रशासन की ओर से यह तर्क दिया गया था कि ऐतिहासिक रूप से सैयद सालार मसूद गाजी को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा जाता है, जिन पर देश के विभिन्न हिस्सों में लूटपाट और मंदिरों पर हमलों के आरोप लगाए जाते रहे हैं। प्रशासन ने विशेष रूप से यह भी कहा कि सोमनाथ मंदिर सहित कई ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने के आरोप उनसे जुड़े रहे हैं। ऐसे में उनके नाम पर सार्वजनिक आयोजन की अनुमति देना कानून-व्यवस्था के लिहाज से उचित नहीं होगा।

हाईकोर्ट में पहुंचा मामला

मेले के आयोजन पर रोक लगाए जाने के बाद आयोजकों और संबंधित पक्षों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रशासन के फैसले को चुनौती दी और मेले के आयोजन की अनुमति देने की मांग की।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह मेला वर्षों से स्थानीय परंपरा का हिस्सा रहा है और इसे अचानक रोकना लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है। उन्होंने यह भी दलील दी कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा को बनाए रखना है, न कि किसी प्रकार की विवादित गतिविधि को बढ़ावा देना।

अदालत का रुख

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सीधे तौर पर मेले के आयोजन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में पहले संबंधित निचली अदालत में याचिका दाखिल की जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि बिना निचली अदालत में मामला उठाए सीधे उच्च न्यायालय में राहत की मांग करना न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।

इसलिए अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे पहले सक्षम निचली अदालत में अपनी बात रखें। वहां से जो भी निर्णय आएगा, उसके बाद आवश्यक होने पर वे दोबारा उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं।

प्रशासन का पक्ष

स्थानीय प्रशासन और पुलिस का मानना है कि किसी भी आयोजन की अनुमति देने से पहले यह देखना जरूरी है कि उससे क्षेत्र में शांति व्यवस्था प्रभावित न हो। चूंकि सैयद सालार मसूद गाजी से जुड़ा इतिहास विवादित बताया जाता रहा है, इसलिए उनके नाम पर होने वाले आयोजन को लेकर संवेदनशीलता बढ़ जाती है।

प्रशासन का कहना है कि यदि ऐसे आयोजनों से सामाजिक तनाव या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो, तो उन्हें नियंत्रित करना उनकी जिम्मेदारी बनती है। इसी आधार पर पिछले साल भी मेले की अनुमति नहीं दी गई थी।

सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू

वहीं दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का एक वर्ग इसे अपनी परंपरा और आस्था से जुड़ा आयोजन मानता है। उनका कहना है कि वर्षों से यह मेला बिना किसी बड़े विवाद के आयोजित होता रहा है और इससे स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।

ऐसे में अब यह मामला केवल प्रशासनिक अनुमति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बन चुका है।

आगे क्या?

अब जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत में जाने का निर्देश दिया है, ऐसे में आयोजकों के सामने अगला विकल्प निचली अदालत का रुख करना ही बचता है।

यदि निचली अदालत इस मामले में कोई फैसला सुनाती है, तो उसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल नेजा मेले के आयोजन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और सभी की निगाहें आने वाले कानूनी फैसलों पर टिकी हैं।

The Allahabad High Court has rejected a petition seeking permission to organize the traditional Neja Mela in Sambhal, which is held annually in the name of Syed Salar Masud Ghazi. The court directed the petitioner to first approach the lower court before seeking relief from the High Court. The dispute over Neja Mela in Sambhal has gained attention due to administrative concerns regarding law and order and historical controversies associated with Syed Salar Masud Ghazi, making it a significant legal and cultural issue in Uttar Pradesh.

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