AIN NEWS 1: हरियाणा के कुरुक्षेत्र में लिविंग इंडिया न्यूज़ के मैनेजिंग डायरेक्टर अतुल अग्रवाल समेत पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद मीडिया जगत में चर्चा तेज हो गई है। पुलिस का आरोप है कि चैनल ने करीब छह महीने पुराने एक निजी वीडियो को ताजा लाइव स्टिंग ऑपरेशन के तौर पर प्रसारित किया। शिकायतकर्ता ने वीडियो को लेकर ब्लैकमेल किए जाने का आरोप भी लगाया है। दूसरी ओर, चैनल ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे हरियाणा में नशे के खिलाफ की जा रही रिपोर्टिंग से जोड़ा है। मामला अब पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले का है। पुलिस के अनुसार, शहर थानेसर थाने में मिली शिकायत के आधार पर लिविंग इंडिया न्यूज़ से जुड़े लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि 16 अप्रैल 2026 को रिकॉर्ड किए गए एक पुराने निजी वीडियो को इस तरह प्रस्तुत किया गया, जैसे वह हाल ही में किया गया लाइव स्टिंग ऑपरेशन हो।
पुलिस का कहना है कि वीडियो में कुछ लोगों को कथित तौर पर नशीले पदार्थों का सेवन करते हुए दिखाया गया था। चैनल की रिपोर्ट में इस वीडियो को हरियाणा में नशे की समस्या से जोड़कर पेश किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वीडियो की वास्तविक परिस्थितियों को उजागर करने की बात को लेकर उसे कथित रूप से ब्लैकमेल किया गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस वीडियो की मूल रिकॉर्डिंग, उसे तैयार करने की परिस्थितियों और प्रसारण से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
अतुल अग्रवाल समेत पांच लोगों की गिरफ्तारी
कुरुक्षेत्र पुलिस ने 10 अक्टूबर 2026 को लिविंग इंडिया न्यूज़ से जुड़े पांच लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें चैनल के मैनेजिंग डायरेक्टर अतुल अग्रवाल, संपादक सौरभ, एंकर सुदेश नैन मोर, पत्रकार नीतू और कर्मचारी लवप्रीत शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। एफआईआर की सभी धाराओं और आरोपों की सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक प्राथमिकी का अवलोकन जरूरी है।
अतुल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि इसमें एक मीडिया संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारी और पत्रकारों के साथ चैनल से जुड़े अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं।
अदालत ने पुलिस रिमांड पर भेजा
गिरफ्तारी के बाद पांचों आरोपियों को 11 अक्टूबर को कुरुक्षेत्र की अदालत में पेश किया गया। मीडिया रिपोर्टों में पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन के हवाले से बताया गया कि अदालत ने आरोपियों को अलग-अलग अवधि के लिए पुलिस रिमांड पर भेजा।
रिपोर्टों के अनुसार, अतुल अग्रवाल और पत्रकार नीतू को चार दिन, एंकर सुदेश नैन मोर और संपादक सौरभ को तीन दिन तथा लवप्रीत को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।
पुलिस का उद्देश्य इस दौरान वीडियो की रिकॉर्डिंग, उसके प्रसारण, आरोपियों की कथित भूमिका और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करना है।
यह स्पष्ट रहना चाहिए कि पुलिस रिमांड जांच का हिस्सा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहरा दिया है।
पुलिस ने व्हाट्सऐप चैट और डिजिटल साक्ष्यों का किया उल्लेख
कुरुक्षेत्र के पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन ने मीडिया को बताया कि जांच के दौरान आरोपियों के बीच हुई कथित व्हाट्सऐप बातचीत से महत्वपूर्ण जानकारी मिलने का दावा किया गया है। पुलिस के अनुसार, मूल वीडियो, मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया गया है।
पुलिस इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वीडियो कब और किन परिस्थितियों में बनाया गया था, उसे समाचार के रूप में किस तरह प्रस्तुत किया गया और प्रसारण से पहले या बाद में क्या बातचीत हुई थी।
इसके अतिरिक्त, पुलिस ने इस पहलू की भी जांच करने की बात कही है कि कथित रूप से भ्रामक सामग्री प्रसारित करने के पीछे क्या उद्देश्य था।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से यह दावा भी किया गया कि इस मामले में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की छवि को नुकसान पहुंचाने और पंजाब चुनाव के संदर्भ में राजनीतिक प्रभाव डालने की आशंका की जांच की जा रही है। फिलहाल इसे पुलिस का प्रारंभिक दावा ही माना जाना चाहिए। किसी राजनीतिक साजिश का अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बिना नहीं निकाला जा सकता।
विवादित रिपोर्ट का मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र से क्या संबंध है?
गिरफ्तारी से एक दिन पहले लिविंग इंडिया न्यूज़ ने हरियाणा में नशे की समस्या से जुड़ी एक रिपोर्ट प्रसारित की थी। रिपोर्ट का शीर्षक था, “उड़ता हरियाणा: सैनी का लाडवा नशे में उड़ रहा।”
लाडवा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का विधानसभा क्षेत्र है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मुख्यमंत्री दूसरे राज्य में नशे के खिलाफ अभियान की बात कर रहे हैं, जबकि उनके अपने विधानसभा क्षेत्र में भी युवाओं के नशे की चपेट में होने की समस्या मौजूद है।
रिपोर्ट में एंकर सुदेश नैन मोर और पत्रकार नीतू की भूमिका बताई गई है। पुलिस की कार्रवाई के बाद यह सवाल उठा कि क्या गिरफ्तारी का संबंध इस रिपोर्टिंग से है या फिर पुलिस द्वारा लगाए गए पुराने वीडियो और कथित ब्लैकमेलिंग के आरोपों से।
चैनल ने कार्रवाई को नशे के खिलाफ अपनी पत्रकारिता से जोड़कर देखा है, जबकि पुलिस का कहना है कि जांच का आधार शिकायत और उपलब्ध साक्ष्य हैं। दोनों पक्षों के दावों की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
चैनल ने क्या कहा?
लिविंग इंडिया न्यूज़ और उससे जुड़े मीडिया मंचों ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं। चैनल का कहना है कि वह हरियाणा में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ रिपोर्टिंग कर रहा था और जनहित के मुद्दों को सामने ला रहा था।
चैनल ने यह भी सवाल उठाया कि यदि पत्रकार सार्वजनिक हित में किसी समस्या को उजागर करते हैं, तो उनके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई क्यों की जा रही है।
दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि मामला केवल नशे पर रिपोर्टिंग करने का नहीं है। जांच का केंद्र पुराने निजी वीडियो को कथित रूप से नए स्टिंग के रूप में प्रस्तुत करने और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए ब्लैकमेलिंग के आरोप हैं।
ऐसे मामलों में चैनल के बयान और पुलिस के दावों, दोनों की जांच जरूरी है। किसी भी पक्ष को बिना पर्याप्त साक्ष्य सही या गलत घोषित करना उचित नहीं होगा।
प्रेस की स्वतंत्रता पर भी उठे सवाल
पत्रकारों की गिरफ्तारी के बाद प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। चंडीगढ़ प्रेस क्लब ने कार्रवाई पर चिंता जताई और अधिकारियों से गिरफ्तारी के आधार स्पष्ट करने तथा पत्रकारों के कानूनी अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।
विपक्ष के नेताओं ने भी गिरफ्तारी पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि नशे जैसी गंभीर सामाजिक समस्या की जांच और रिपोर्टिंग निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए।
यह मामला पत्रकारिता की स्वतंत्रता और कानून के पालन, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पत्रकारों को जनहित के मुद्दे उठाने का अधिकार है, लेकिन किसी भी व्यक्ति की निजता, डिजिटल सामग्री के इस्तेमाल और कथित ब्लैकमेलिंग से जुड़े आरोप भी कानून के दायरे में जांचे जा सकते हैं।
अब आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में पुलिस की जांच इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी। जांच एजेंसियां मूल वीडियो, मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, कथित व्हाट्सऐप चैट और शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने का प्रयास करेंगी।
इसके बाद पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्य और दोनों पक्षों की दलीलें मामले के अंतिम परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
अतुल अग्रवाल समेत लिविंग इंडिया न्यूज़ के पांच लोगों की गिरफ्तारी पुराने निजी वीडियो को कथित रूप से फर्जी लाइव स्टिंग के रूप में प्रसारित करने और ब्लैकमेलिंग की शिकायत से जुड़ी है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। वहीं, चैनल ने कार्रवाई को अपनी नशा-विरोधी रिपोर्टिंग से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं।
फिलहाल इस मामले में आरोपों को साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता। जांच के निष्कर्ष, अदालत में प्रस्तुत साक्ष्य और न्यायिक निर्णय ही तय करेंगे कि आरोपियों की भूमिका क्या थी और कानून के तहत आगे क्या कार्रवाई होनी चाहिए।
नोट: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और पुलिस के सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। मामले में अंतिम दोषसिद्धि की पुष्टि नहीं हुई है।
Haryana Police arrested Living India News Managing Director Atul Aggarwal and four other channel staff members in the Kurukshetra fake sting operation case. Police allege that a personal video recorded on April 16, 2026, was presented as a recent live sting operation and that the complainant was subsequently subjected to alleged blackmail. The accused were produced before a court and remanded to police custody for further investigation. Living India News has questioned the police action, linking it to its reporting on drug-related issues in Haryana. The case has also raised concerns about press freedom, journalistic accountability, digital evidence and the legal rights of journalists. The allegations remain under investigation, and guilt has not been established by a court.



















