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E20 पेट्रोल पर सर्वे में उठे सवाल: क्या सचमुच घट रहा है माइलेज और बढ़ रहा है वाहन खर्च? जानिए पूरी रिपोर्ट!

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AIN NEWS 1: भारत में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने की सरकार की नीति को लेकर एक नया सर्वे सामने आया है, जिसने E20 पेट्रोल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सर्वे में शामिल हजारों वाहन मालिकों ने दावा किया कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी गाड़ियों का माइलेज कम हुआ है और रखरखाव का खर्च भी बढ़ा है। हालांकि यह सर्वे वाहन मालिकों की राय पर आधारित है, इसलिए इसे वैज्ञानिक परीक्षण या सरकारी निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद सर्वे के नतीजों ने E20 पेट्रोल के प्रभाव को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

देशभर में प्रदूषण कम करने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और किसानों को एथेनॉल उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार चरणबद्ध तरीके से E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है।

सरकार का मानना है कि इससे पर्यावरण को लाभ मिलेगा और विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। लेकिन दूसरी ओर कई वाहन मालिकों का कहना है कि इस ईंधन के उपयोग के बाद उन्हें पहले जैसी परफॉर्मेंस नहीं मिल रही है।

सर्वे में क्या सामने आया?

हाल ही में नागरिक समुदाय मंच LocalCircles द्वारा देश के 316 जिलों के 22,567 वाहन मालिकों के बीच एक सर्वे किया गया। इस सर्वे में लोगों से E20 पेट्रोल के उपयोग के अनुभव पूछे गए।

सर्वे के अनुसार लगभग 66 प्रतिशत वाहन मालिकों ने कहा कि उनकी गाड़ी का माइलेज 10 प्रतिशत या उससे अधिक कम हो गया है। कई लोगों ने दावा किया कि पहले की तुलना में अब समान दूरी तय करने के लिए अधिक पेट्रोल की जरूरत पड़ रही है।

इसके अलावा करीब 45 प्रतिशत लोगों ने कहा कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद वाहन के रखरखाव और मरम्मत पर पहले से ज्यादा खर्च आ रहा है। कुछ लोगों ने इंजन की परफॉर्मेंस, पिकअप और स्मूथनेस में भी कमी महसूस होने की बात कही।

E20 रोलआउट को लेकर लोगों की राय

सर्वे में शामिल 53 प्रतिशत लोगों ने माना कि E20 पेट्रोल लागू करने की वर्तमान व्यवस्था प्रभावी नहीं रही। वहीं 42 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसे लागू करने की प्रक्रिया बेहतर तरीके से की जानी चाहिए थी।

करीब 31 प्रतिशत लोगों ने सुझाव दिया कि उपभोक्ताओं को E0 या E10 पेट्रोल का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि वे अपनी गाड़ी के अनुसार ईंधन का चयन कर सकें।

वहीं 19 प्रतिशत लोगों ने व्यवस्था को सामान्य या ठीक-ठाक बताया। कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें कोई विशेष परेशानी नहीं हुई, जबकि लगभग 6 प्रतिशत लोगों ने E20 को ठीक से काम न करने वाला बताया और करीब 5 प्रतिशत लोगों ने इसे पूरी तरह अनुपयोगी बताया।

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क्या सभी वाहनों पर समान प्रभाव पड़ता है?

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि सभी वाहनों पर E20 पेट्रोल का असर एक जैसा नहीं होता। अप्रैल 2023 के बाद तैयार किए गए कई नए वाहन E20 ईंधन को ध्यान में रखकर डिजाइन किए गए हैं। ऐसे वाहनों में आमतौर पर किसी बड़ी समस्या की संभावना कम होती है।

हालांकि पुराने मॉडल के वाहनों में, विशेष रूप से वे जिनके निर्माता ने E20 की अनुमति नहीं दी है, वहां माइलेज या कुछ तकनीकी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। इसलिए वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी की कंपनी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।

सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। सरकार का कहना है कि इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा, पेट्रोलियम आयात पर खर्च घटेगा और देश के गन्ना तथा अन्य फसलों के किसानों को लाभ मिलेगा।

सरकार और तेल कंपनियों का यह भी कहना है कि नए E20-रेडी वाहनों में इस ईंधन का सुरक्षित उपयोग किया जा सकता है। हालांकि सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि वाहन निर्माता कंपनियां और उपभोक्ता दोनों निर्धारित मानकों का पालन करें।

क्या यह सर्वे अंतिम सच है?

ध्यान देने वाली बात यह है कि LocalCircles का यह सर्वे लोगों के अनुभवों पर आधारित है। यह कोई वैज्ञानिक परीक्षण, सरकारी अध्ययन या तकनीकी जांच नहीं है। इसलिए सर्वे के निष्कर्षों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।

विशेषज्ञों का मानना है कि E20 पेट्रोल के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए विभिन्न प्रकार के वाहनों पर लंबे समय तक तकनीकी अध्ययन और स्वतंत्र परीक्षण आवश्यक हैं।

वाहन मालिकों के लिए क्या सलाह?

यदि आपकी गाड़ी E20 ईंधन के लिए प्रमाणित है, तो निर्माता कंपनी की सलाह के अनुसार इसका उपयोग किया जा सकता है। लेकिन यदि आपकी गाड़ी पुरानी है और उसके बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है, तो वाहन निर्माता या अधिकृत सर्विस सेंटर से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

साथ ही यदि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद माइलेज, इंजन की आवाज, पिकअप या किसी अन्य तकनीकी समस्या का अनुभव हो रहा है, तो वाहन की जांच कराना उचित होगा।

LocalCircles के सर्वे ने E20 पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों की चिंताओं को सामने रखा है। सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों ने माइलेज घटने और मरम्मत खर्च बढ़ने की बात कही है। हालांकि यह केवल उपभोक्ताओं के अनुभवों पर आधारित सर्वे है, इसलिए इसे वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता।

ऐसे में E20 पेट्रोल को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले व्यापक तकनीकी अध्ययन और आधिकारिक परीक्षणों का इंतजार करना जरूरी है। फिलहाल वाहन मालिकों के लिए सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि वे अपनी गाड़ी के निर्माता द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करें और उसी के अनुसार ईंधन का चयन करें।

The latest E20 Petrol Survey in India has raised concerns among vehicle owners, with many reporting reduced mileage, higher vehicle repair costs, and mixed experiences with ethanol blended fuel (E20 Petrol). Conducted across 316 districts with over 22,500 respondents, the survey highlights public perception regarding the government’s ethanol blending policy, fuel efficiency, and vehicle compatibility. While the findings are based on consumer feedback rather than scientific testing, the report has intensified discussions around E20 fuel, vehicle performance, mileage loss, and the future of India’s ethanol-blended petrol program.

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