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मेरठ के फर्जी पत्रकारों का गाजियाबाद में उगाही गैंग बेनकाब, एसोसिएशन ने रंगे हाथों पकड़ा!

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AIN NEWS 1: गाजियाबाद शहर में पत्रकारिता के नाम पर चल रहे एक कथित उगाही रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। इस पूरे मामले ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि आम लोगों को भी झकझोर कर रख दिया है। आरोप है कि कुछ लोग खुद को पत्रकार बताकर व्यापारियों और आम नागरिकों को डराकर पैसे वसूल रहे थे। यह घटना बताती है कि कैसे भरोसेमंद पेशों का दुरुपयोग कर अपराधी अपने मंसूबे पूरे करने की कोशिश कर रहे हैं।

कैसे सामने आया पूरा मामला

यह घटना गाजियाबाद के नंदग्राम थाना क्षेत्र की है, जहां एक स्थानीय व्यापारी अपने घर में मरम्मत का काम करवा रहा था। इसी दौरान दो व्यक्ति उसके पास पहुंचे और खुद को एक डिजिटल न्यूज चैनल से जुड़ा पत्रकार बताने लगे। उन्होंने व्यापारी को डराया कि उसका निर्माण कार्य नियमों के खिलाफ है और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) कभी भी कार्रवाई कर सकता है।

धीरे-धीरे उन्होंने अपनी बातों में दबाव बढ़ाना शुरू किया। आरोपियों ने कहा कि अगर व्यापारी ने उन्हें “मैनेजमेंट फीस” के तौर पर मोटी रकम नहीं दी, तो वे उसके खिलाफ शिकायत कर देंगे, जिससे भारी जुर्माना या बुलडोजर कार्रवाई हो सकती है। व्यापारी पहले तो घबरा गया, लेकिन बाद में उसे शक हुआ और उसने मदद लेने का फैसला किया।

एसोसिएशन और पुलिस की मदद से बिछाया गया जाल

व्यापारी ने इस पूरे मामले की जानकारी एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन की अध्यक्ष अपूर्वा चौधरी और स्थानीय पुलिस को दी। शिकायत मिलते ही एक योजना बनाई गई, ताकि आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा जा सके।

योजना के तहत व्यापारी ने आरोपियों को पैसे लेने के लिए बुलाया। इस दौरान पूरी बातचीत को रिकॉर्ड करने के लिए हिडन कैमरों की व्यवस्था की गई। करीब दो घंटे तक चली बातचीत में दोनों तथाकथित पत्रकार लगातार अपने “ऊंचे संपर्कों” और “प्रभाव” की बातें करते रहे। उन्होंने दावा किया कि वे प्रशासनिक अधिकारियों से सीधे संपर्क में हैं और किसी भी कार्रवाई को रुकवा सकते हैं।

रंगे हाथों गिरफ्तारी

जैसे ही व्यापारी ने उन्हें 20,000 रुपये दिए, उसी समय अपूर्वा चौधरी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं और दोनों को पकड़ लिया। तलाशी लेने पर उनके पास से वही नकदी बरामद हुई, जो व्यापारी से ली गई थी।

घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई, जो मौके पर पहुंची और आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।

जांच में क्या सामने आया

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि वे मेरठ के रहने वाले हैं और पत्रकारिता से उनका कोई वास्तविक संबंध नहीं है। उनके पास से एक डिजिटल न्यूज चैनल का आईडी कार्ड और माइक आईडी जरूर मिली, लेकिन जांच में यह सामने आया कि यह सब केवल दिखावा था।

असल में ये लोग लंबे समय से इसी तरह का काम कर रहे थे—जहां भी निर्माण कार्य या कोई छोटी प्रशासनिक कमजोरी दिखती, वहां पहुंचकर लोगों को डराते और पैसे वसूलते।

माफी और चेतावनी के बाद छोड़ा गया

पकड़े जाने के बाद दोनों आरोपियों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। उन्होंने कैमरे के सामने कबूल किया कि वे पत्रकार नहीं हैं और केवल उगाही के लिए यह सब कर रहे थे।

मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए और भविष्य में ऐसी हरकत न करने की सख्त चेतावनी के साथ, उनसे लिखित माफीनामा लिया गया और उन्हें छोड़ दिया गया। इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं—कुछ लोग इसे सुधार का मौका मान रहे हैं, तो कुछ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

अपूर्वा चौधरी का बयान

अपूर्वा चौधरी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी का करियर बर्बाद करना नहीं, बल्कि समाज में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे लोगों को एक मौका देकर सही रास्ते पर लाया जा सकता है, तो यह समाज के लिए बेहतर होगा।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति होती है, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

शहर में बढ़ती फर्जी पत्रकारों की समस्या

इस घटना के बाद शहर में फर्जी पत्रकारों की बढ़ती संख्या को लेकर चिंता जताई जा रही है। आजकल कोई भी व्यक्ति गले में आईडी कार्ड डालकर खुद को पत्रकार बताने लगता है और लोगों को धमकाने लगता है।

इससे असली पत्रकारों की छवि भी खराब होती है, जो ईमानदारी से समाज की समस्याओं को उठाते हैं। जनता के मन में अविश्वास पैदा होना लोकतंत्र के लिए भी एक गंभीर संकेत है।

प्रशासन से क्या मांग की गई

एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने घोषणा की है कि वे इस मुद्दे को लेकर जल्द ही पुलिस कमिश्नर, जिला अधिकारी और जिला सूचना अधिकारी से मुलाकात करेंगे। उनकी मुख्य मांगें हैं:

शहर में सक्रिय पत्रकारों का सत्यापन किया जाए

फर्जी पत्रकारों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई हो

आम लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाए

जनता से अपील

एसोसिएशन ने शहर के लोगों से अपील की है कि अगर कोई व्यक्ति खुद को पत्रकार बताकर डराता है या पैसे मांगता है, तो घबराएं नहीं। तुरंत इसकी सूचना पुलिस या एसोसिएशन को दें।

यह जरूरी है कि ऐसे मामलों में लोग चुप न रहें, क्योंकि चुप्पी ही अपराधियों को बढ़ावा देती है।

A shocking case of fake journalists running an extortion racket in Ghaziabad has come to light, where a Meerut-based gang was caught red-handed while demanding money from a local trader. Posing as media professionals, the accused threatened victims with administrative action and used fear tactics to extract cash. The incident highlights the growing menace of fake journalists, media fraud, and extortion in India, raising serious concerns about trust in journalism and the need for strict verification systems.

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