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महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़: पवार परिवार तय करेगा अगला डिप्टी सीएम, NCP विलय के संकेत

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AIN NEWS 1 | महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर निर्णायक दौर में प्रवेश करती नजर आ रही है। भतीजे की अचानक मौत के बाद पवार परिवार के भीतर राजनीतिक भविष्य को लेकर मंथन तेज हो गया है। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों धड़े — शरद पवार गुट और अजित पवार गुट — अब एक बार फिर एकजुट होने की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि पार्टी के विलय से लेकर महाराष्ट्र के अगले उपमुख्यमंत्री तक का फैसला अब सीधे पवार परिवार के स्तर पर होगा।

NCP के विलय की ओर बढ़ते कदम

पिछले कुछ महीनों से यह चर्चा लगातार चल रही थी कि एनसीपी के दोनों गुटों के बीच दूरियां कम हो रही हैं। अब हालिया घटनाक्रम के बाद यह अटकलें और मजबूत हो गई हैं। पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शरद पवार और अजित पवार परिवार के वरिष्ठ सदस्यों के साथ बैठकर भविष्य की रणनीति पर अंतिम चर्चा करने वाले हैं।

माना जा रहा है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर इस विषय पर बड़ी बैठक हो सकती है, जिसमें दोनों गुटों के विलय को लेकर औपचारिक घोषणा भी संभव है। यदि ऐसा होता है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा घटनाक्रम माना जाएगा।

अगला डिप्टी सीएम कौन? फैसला शरद पवार के हाथ

सूत्रों के अनुसार, अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि महाराष्ट्र का अगला उपमुख्यमंत्री कौन होगा, इसका निर्णय शरद पवार स्वयं करेंगे। अजित पवार के राजनीतिक उत्तराधिकारी को लेकर पार्टी के भीतर लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन अब यह मामला पारिवारिक सहमति से सुलझाने की तैयारी है।

बताया जा रहा है कि पवार परिवार चाहता है कि किसी भी फैसले से पहले अंदरूनी मतभेद पूरी तरह खत्म कर दिए जाएं, ताकि पार्टी को भविष्य में फिर किसी विभाजन का सामना न करना पड़े।

पवार परिवार की बैठक पर टिकी निगाहें

राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा नजर उस बैठक पर टिकी हुई है, जिसमें पवार परिवार के वरिष्ठ सदस्य एक साथ बैठेंगे। इस बैठक में तीन अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है:

  1. NCP के दोनों गुटों का औपचारिक विलय
  2. पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व किसे सौंपा जाए
  3. महाराष्ट्र सरकार में डिप्टी सीएम और अहम विभागों की जिम्मेदारी

पार्टी सूत्रों का कहना है कि जो नाम इस बैठक में तय होगा, उसी पर आगे पूरी राजनीतिक दिशा निर्भर करेगी।

सुनेत्रा पवार को लेकर बढ़ता दबाव

इसी बीच अजित पवार गुट के भीतर एक नया राजनीतिक दबाव भी उभरता दिखाई दे रहा है। कई विधायक और वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि सुनेत्रा पवार को पार्टी की कमान सौंपी जाए। इसे लेकर पार्टी के भीतर लगातार बैठकें हो रही हैं।

जानकारी के मुताबिक, एनसीपी के कई नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव रखने की तैयारी कर चुके हैं। योजना के अनुसार, दोपहर करीब 12 बजे सभी नेता एक साथ मुख्यमंत्री के वर्षा निवास पहुंचकर मुलाकात करेंगे।

मुख्यमंत्री से मुलाकात, बनेगी नई रणनीति

इस अहम राजनीतिक घटनाक्रम के बीच वरिष्ठ नेता छगन भुजबल भी मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले हैं। माना जा रहा है कि इस बातचीत में केवल संगठन नहीं, बल्कि सरकार में शक्ति संतुलन, नेतृत्व और विभागों के बंटवारे पर भी चर्चा होगी।

सूत्र बताते हैं कि एनसीपी नेताओं की मंशा है कि पार्टी को स्थिर नेतृत्व मिले, जिससे सरकार के भीतर किसी तरह की अस्थिरता न रहे।

प्रफुल्ल पटेल को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव

एनसीपी के अंदर एक और बड़ा प्रस्ताव सामने आया है। पार्टी नेताओं का मानना है कि वर्तमान वर्किंग प्रेसिडेंट प्रफुल्ल पटेल को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए।

उनका तर्क है कि प्रफुल्ल पटेल का राष्ट्रीय राजनीति में अनुभव है और वे दोनों गुटों को साथ लेकर चलने की क्षमता रखते हैं। यदि यह प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो यह भी एनसीपी की नई राजनीतिक संरचना का अहम हिस्सा होगा।

अजित पवार के विभागों पर भी मंथन

महायुति सरकार में अजित पवार के पास उपमुख्यमंत्री पद के साथ-साथ वित्त, उत्पाद शुल्क और खेल जैसे महत्वपूर्ण विभाग थे। अब उनके भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

पार्टी के भीतर इस बात पर गंभीर चर्चा चल रही है कि:

  • क्या वही विभाग नए डिप्टी सीएम को दिए जाएंगे?
  • या फिर विभागों का पुनर्वितरण होगा?

इन सवालों के जवाब भी पवार परिवार की बैठक के बाद ही सामने आने की उम्मीद है।

क्यों अहम है यह फैसला?

एनसीपी महाराष्ट्र की राजनीति की रीढ़ मानी जाती रही है। पार्टी के टूटने से न केवल संगठन कमजोर हुआ, बल्कि मतदाताओं में भी भ्रम की स्थिति बनी। अब यदि दोनों गुट एकजुट होते हैं, तो इससे:

  • पार्टी की राजनीतिक ताकत फिर से मजबूत होगी
  • सरकार को स्थिरता मिलेगी
  • विपक्ष और सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं

यही वजह है कि पूरे राज्य की निगाहें इस फैसले पर टिकी हुई हैं।

राजनीतिक संकेत क्या कहते हैं?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हालिया पारिवारिक घटनाओं के बाद पवार परिवार भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर एकजुट होना चाहता है। यही कारण है कि फैसले को जल्द लेने की कोशिश की जा रही है।

यदि अगले दो दिनों में विलय का ऐलान होता है, तो यह आने वाले विधानसभा और लोकसभा समीकरणों पर सीधा असर डालेगा।

महाराष्ट्र की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। NCP के भविष्य से लेकर राज्य के अगले डिप्टी सीएम तक, हर बड़ा फैसला अब पवार परिवार की सहमति से तय होता दिखाई दे रहा है। आने वाले 48 घंटे यह तय करेंगे कि क्या एनसीपी एक बार फिर एकजुट होकर राज्य की राजनीति में नई ताकत बनकर उभरेगी या फिर यह मंथन और लंबा चलेगा।

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