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बंगाल में टीएमसी के तीनों गुट सरकार के निशाने पर, ममता से लेकर ऋतब्रत और हुमायूं कबीर तक बढ़ा दबाव

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AIN NEWS 1 | पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अब अपने सबसे बड़े संगठनात्मक संकट का सामना कर रही है। पार्टी न केवल सत्ता से बाहर हो चुकी है, बल्कि अलग-अलग गुटों में बंटने के बाद उसकी राजनीतिक चुनौतियां और बढ़ गई हैं।

वर्तमान स्थिति में टीएमसी तीन प्रमुख धड़ों में बंटी हुई दिखाई दे रही है। पहला गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला है, दूसरा ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बना बागी गुट और तीसरा हुमायूं कबीर का अलग राजनीतिक दल। इन तीनों धड़ों पर राज्य सरकार की नजर बनी हुई है और अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई तथा जांच जारी है।

चुनाव के बाद गहराया टीएमसी का संकट

राज्य विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा। सत्ता गंवाने के साथ-साथ पार्टी के भीतर भी बड़े पैमाने पर टूट देखने को मिली।

राजनीतिक घटनाक्रम के अनुसार, हुमायूं कबीर चुनाव से पहले ही टीएमसी से अलग होकर अपनी नई पार्टी बना चुके थे और चुनाव में दो सीटें जीतने में सफल रहे।

वहीं चुनाव परिणाम आने के बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायकों ने अलग रास्ता अपना लिया। दूसरी ओर ममता बनर्जी के साथ उनके वफादार नेताओं का एक अलग गुट बना रहा।

ममता बनर्जी गुट पर बढ़ा दबाव

सत्ता से बाहर होने के बाद ममता बनर्जी अपने समर्थक नेताओं के साथ संगठन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।

इसी बीच राज्य सरकार ने पूर्ववर्ती शासनकाल के दौरान कथित भ्रष्टाचार, भर्ती घोटालों, राशन घोटाले और अन्य मामलों की जांच तेज कर दी है। इन मामलों में कई नेताओं के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन कार्रवाइयों का असर टीएमसी के मूल संगठन पर भी पड़ रहा है।

शहीद दिवस कार्यक्रम को नहीं मिली अनुमति

टीएमसी के लिए 21 जुलाई का शहीद दिवस बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक आयोजन माना जाता है। हर वर्ष पार्टी इस दिन बड़े स्तर पर शक्ति प्रदर्शन करती रही है।

इस बार ममता बनर्जी गुट ने भी कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की थी, लेकिन प्रशासन ने संबंधित क्षेत्र में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू होने का हवाला देते हुए अनुमति नहीं दी।

इसके चलते पार्टी का प्रस्तावित कार्यक्रम आयोजित नहीं हो सका।

ऋतब्रत बनर्जी गुट भी सरकार के निशाने पर

टीएमसी से अलग हुए ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट भी अब सरकार के साथ टकराव की स्थिति में दिखाई दे रहा है।

विधानसभा में सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़े प्रस्ताव पर गठित समिति का इस गुट ने विरोध किया और सदन से वॉकआउट किया।

इसके बाद सरकार की ओर से संकेत दिए गए कि सरकारी एजेंडे में बाधा डालने वाले किसी भी राजनीतिक समूह के प्रति सख्त रुख अपनाया जाएगा।

बताया जा रहा है कि ऋतब्रत बनर्जी गुट ने भी शहीद दिवस पर अलग कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी, लेकिन उसे भी प्रशासनिक अनुमति नहीं मिली।

हुमायूं कबीर पर कानूनी कार्रवाई

टीएमसी से निलंबित होने के बाद अपनी अलग पार्टी बनाने वाले विधायक हुमायूं कबीर भी सरकार के निशाने पर हैं।

हाल ही में एक जनसभा में दिए गए उनके बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया। सरकार का आरोप है कि उनके बयान से सामाजिक तनाव फैल सकता है।

इसी मामले में उनके खिलाफ संबंधित थानों में आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं और पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच कर रही है।

सरकार का क्या कहना है?

राज्य सरकार का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी व्यक्ति या संगठन को कानून व्यवस्था प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सरकार का यह भी कहना है कि जिन मामलों में जांच चल रही है, उनमें उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जा रही है।

विपक्ष का आरोप

दूसरी ओर विपक्षी नेताओं का आरोप है कि राजनीतिक विरोधियों पर प्रशासनिक और कानूनी दबाव बनाया जा रहा है।

हालांकि सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि सभी कार्रवाई कानून के दायरे में और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर की जा रही है।

बंगाल की राजनीति पर नजर

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति आने वाले महीनों में और दिलचस्प हो सकती है। एक ओर टीएमसी अपने संगठन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं अलग हुए गुट अपनी राजनीतिक पहचान स्थापित करने में जुटे हैं।

उधर राज्य सरकार प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर सक्रिय दिखाई दे रही है। ऐसे में आने वाले समय में इन तीनों राजनीतिक धड़ों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति और तेज हो सकती है।

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस गंभीर राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के अलग-अलग गुट अपने-अपने स्तर पर सक्रिय हैं, जबकि राज्य सरकार विभिन्न मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही है।

फिलहाल राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं और आने वाले दिनों में इन मामलों में होने वाली प्रशासनिक तथा न्यायिक प्रक्रियाओं पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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