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प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज, नाबालिग शिष्यों के यौन शोषण के आरोपों से मचा हड़कंप!

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AIN NEWS 1: प्रयागराज में धार्मिक जगत से जुड़ी एक बेहद संवेदनशील और गंभीर खबर सामने आई है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के आरोपों में POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई है। यह FIR झूंसी थाना में दर्ज की गई है, जिसमें उनके शिष्य मुकुंदानंद सहित 2-3 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।

यह मामला उस समय तूल पकड़ गया जब जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट में याचिका दायर कर नाबालिग बच्चों के साथ कथित यौन शोषण का आरोप लगाया।

📌 कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR

जानकारी के अनुसार, आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा कोर्ट में पेश की गई शिकायत के आधार पर विशेष पॉक्सो अदालत ने 21 फरवरी 2026 को पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। इससे पहले 13 फरवरी को अदालत ने दोनों नाबालिग बच्चों के बयान कैमरे के सामने दर्ज किए थे और मामले की गंभीरता को देखते हुए अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोप अत्यंत गंभीर और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस जांच अनिवार्य है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल निजी शिकायत के रूप में इस मामले को आगे बढ़ाना न्यायोचित नहीं होगा, क्योंकि इसमें बाल संरक्षण से जुड़े कानून लागू होते हैं।

📌 बच्चों ने कोर्ट में सुनाई आपबीती

सूत्रों के मुताबिक, अदालत में पेश किए गए दोनों नाबालिग बच्चों ने बंद कमरे में जज के सामने अपने साथ हुए कथित शोषण की पूरी कहानी साझा की। कोर्ट रूम को खाली कराकर सिर्फ दोनों पक्षों के वकीलों की मौजूदगी में बच्चों के बयान दर्ज किए गए।

बच्चों का आरोप है कि उन्हें गुरु सेवा के नाम पर शंकराचार्य और उनके सहयोगियों के साथ रहने को मजबूर किया गया। कथित तौर पर यह घटनाएं पिछले एक वर्ष से जारी थीं और महाकुंभ 2025 के दौरान भी मेला क्षेत्र में उनके साथ दुष्कर्म जैसे कृत्य किए गए।

📌 शिकायतकर्ता ने पहले पुलिस से लगाई थी गुहार

आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया कि 24 जनवरी को उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस अधिकारियों से की थी। इसके बाद 25 जनवरी को पुलिस कमिश्नर और माघ मेला प्रशासन को ईमेल के जरिए भी सूचित किया गया।

जब कहीं सुनवाई नहीं हुई, तब 8 फरवरी को उन्होंने विशेष पॉक्सो अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना है कि शिकायत के बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिलने लगी थीं।

📌 किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

इस पूरे मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और POCSO एक्ट की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं:

🔹 BNS धारा 351(3)

डर पैदा करने या दबाव बनाने का आरोप

सजा: 2 से 7 वर्ष तक की जेल और जुर्माना

🔹 POCSO एक्ट धारा 3 और 4(2)

बच्चे के साथ गंभीर यौन शोषण

सजा: 10 साल से लेकर उम्रकैद तक

🔹 धारा 5(i) और 6

पद या प्रभाव का दुरुपयोग कर यौन अपराध

सजा: 20 साल की जेल या उम्रकैद

🔹 धारा 16 और 17

अपराध में सहयोग या उकसाना

सजा: 10 से 20 साल तक की जेल या उम्रकैद

यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपियों को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

📌 शंकराचार्य का पक्ष: “यह फर्जी और साजिशन मामला”

FIR दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह मुकदमा उनके विरोधियों द्वारा राजनीतिक और धार्मिक द्वेष के चलते कराया गया है।

उनका कहना है कि शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी एक हिस्ट्रीशीटर है और पहले भी इस तरह के आरोप लगाकर लोगों को फंसाने की कोशिश कर चुका है। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा मामला उन्हें बदनाम करने और उनकी सामाजिक सक्रियता को रोकने के उद्देश्य से रचा गया है।

📌 रामभद्राचार्य से विवाद के बाद बढ़ा टकराव

गौरतलब है कि हाल ही में माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बीच वैचारिक मतभेद सामने आए थे। इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई थी।

आरोप है कि इसी विवाद के चलते रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने कोर्ट में यह याचिका दायर की। हालांकि, इस पूरे मामले की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।

📌 पुलिस करेगी निष्पक्ष जांच

अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जाए और पीड़ितों की पहचान तथा गरिमा की रक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही जांच पूरी कर रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा, “सच सामने आएगा और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा।”

An FIR has been registered against Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati in Prayagraj under the POCSO Act following allegations of sexual abuse involving minor disciples. The Special POCSO Court ordered a police investigation after recording the victims’ statements in a closed courtroom. The complaint was filed by Ashutosh Brahmachari, leading to the inclusion of multiple serious sections under the Protection of Children from Sexual Offences Act and BNS. The case has sparked nationwide attention due to the involvement of a prominent religious leader and is currently under official investigation by Jhunsi Police in Uttar Pradesh.

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