spot_imgspot_img

यूपी पंचायत चुनाव पर योगी सरकार का बड़ा कदम, हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ डबल बेंच जाएगी सरकार!

spot_img

Date:

यूपी पंचायत चुनाव पर योगी सरकार का बड़ा फैसला, हाईकोर्ट के आदेश को डबल बेंच में देगी चुनौती

AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है, जिसमें ग्राम प्रधानों को पंचायतों का प्रशासक बनाए रखने पर रोक लगाई गई थी। सरकार अब इस मामले को हाईकोर्ट की डबल बेंच या जरूरत पड़ने पर फुल बेंच के सामने ले जाने की तैयारी कर रही है।

पंचायत चुनाव में देरी, ग्राम प्रधानों की भूमिका और ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया को लेकर यह मामला काफी महत्वपूर्ण हो गया है। सरकार का कहना है कि प्रदेश के पंचायती राज अधिनियम में अभी भी वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था का प्रावधान मौजूद है, जबकि हाईकोर्ट ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए ग्राम प्रधानों को लंबे समय तक प्रशासक बनाए रखने पर सवाल उठाए हैं।

हाईकोर्ट ने क्या दिया था आदेश?

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने 25 जून को पंचायत चुनाव से जुड़े मामले में अहम आदेश दिया था।

कोर्ट ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 243(ई) और 243(के) के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल अधिकतम पांच वर्ष का ही हो सकता है। इसके बाद किसी भी स्थिति में निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाया नहीं जा सकता।

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह 13 जुलाई तक पंचायत चुनाव कराने की समयसीमा और पूरी प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराए।

कोर्ट का कहना था कि पंचायत चुनाव कराना राज्य निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है और प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर चुनाव को अनिश्चित समय तक टाला नहीं जा सकता।

सरकार का तर्क क्या है?

राज्य सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947 की धारा 12(3-ए) अभी भी प्रभावी है। इस प्रावधान के तहत यदि किसी कारण से पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाते हैं तो सरकार वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर प्रशासक या प्रशासनिक समिति की नियुक्ति कर सकती है।

सरकार का पक्ष है कि यह व्यवस्था कानून के तहत बनाई गई है और इसका उद्देश्य पंचायतों के कामकाज को सुचारू बनाए रखना है।

हालांकि, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इस प्रावधान का इस्तेमाल पंचायत चुनावों को लगातार टालने या निर्वाचित प्रतिनिधियों को लंबे समय तक पद पर बनाए रखने के लिए नहीं किया जा सकता।

पहले के फैसले का भी दिया गया हवाला

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में पुराने मामले प्रेम लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य का भी उल्लेख किया था। इस मामले में अदालत ने साफ किया था कि पंचायत चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं और चुनाव प्रक्रिया में अनावश्यक देरी संवैधानिक भावना के खिलाफ है।

कोर्ट ने कहा था कि पंचायतों का संचालन अस्थायी व्यवस्था के नाम पर लंबे समय तक नहीं चलाया जा सकता।

पिछड़ा वर्ग आरक्षण बना चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा ओबीसी आरक्षण का है। पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के लिए राज्य सरकार ने 18 मई को उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया था।

इस आयोग का काम प्रदेश में पिछड़े वर्ग की आबादी, सामाजिक और आर्थिक स्थिति तथा वास्तविक पिछड़ेपन का अध्ययन करना है। इसके आधार पर पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण का नया निर्धारण किया जाना है।

आयोग ने प्रदेश के कई जिलों का दौरा कर जानकारी जुटाई है। अब तक मेरठ, हापुड़ और बागपत समेत कई जिलों में अध्ययन किया जा चुका है। सभी 75 जिलों से आंकड़े जुटाकर उनका सत्यापन किया जा रहा है।

नवंबर तक आ सकती है आयोग की रिपोर्ट

पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के अनुसार रिपोर्ट तैयार करने में अभी समय लगेगा। संभावना है कि आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट नवंबर तक राज्य सरकार को सौंप सकता है।

रिपोर्ट मिलने के बाद ही ओबीसी आरक्षण की अंतिम व्यवस्था तय होगी। इसके बाद पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

यही वजह है कि पंचायत चुनावों के साल के अंत तक टलने की संभावना जताई जा रही है।

सरकार की अपील के बाद बदल सकता है मामला

अब पूरे मामले की दिशा सरकार की ओर से दाखिल की जाने वाली अपील और हाईकोर्ट के अगले फैसले पर निर्भर करेगी।

अगर डबल बेंच सरकार के पक्ष को स्वीकार करती है तो पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर स्थिति बदल सकती है। वहीं अगर हाईकोर्ट का पहले वाला आदेश बरकरार रहता है तो सरकार को चुनाव प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ानी पड़ सकती है।

इसके अलावा ओबीसी आरक्षण आयोग की रिपोर्ट भी चुनाव की तारीख तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

फिलहाल उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर कानूनी प्रक्रिया, आरक्षण निर्धारण और प्रशासनिक फैसलों के बीच स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में सरकार की अपील और हाईकोर्ट की सुनवाई से तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

UP Panchayat Election 2026 is one of the most important political and administrative developments in Uttar Pradesh. The Yogi Adityanath government has decided to challenge the Allahabad High Court order regarding the appointment of Gram Pradhans as administrators after the completion of their tenure. The case is linked with UP Panchayat Chunav, OBC reservation, local body elections, constitutional provisions under Article 243(E) and Article 243(K), and the role of the State Election Commission. The final decision of the court and the report of the Uttar Pradesh Dedicated Backward Classes Commission will play a crucial role in determining the timeline of the upcoming Panchayat elections in the state.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
overcast clouds
37.7 ° C
37.7 °
37.7 °
33 %
5.6kmh
90 %
Tue
42 °
Wed
44 °
Thu
38 °
Fri
36 °
Sat
41 °
Video thumbnail
राम मंदिर जा रहे कांग्रेस नेताओं पर कार्रवाई, अजय राय समेत कई नेता
00:20
Video thumbnail
Akhilesh Yadav : “निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लागू करना चाहिए।”
00:05
Video thumbnail
Akhilesh Yadav : "जो लोग वन नेशन वन इलेक्शन की बात कर रहे थे,..."
00:05
Video thumbnail
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ; "कोई भी वकील आरोपियों का पक्ष नहीं रखेगा..."
01:03
Video thumbnail
Ram Mandir Donation Theft : “ये चोरी नहीं 100 करोड़ की डकैती है...”, दान चोरी पर भड़के कांग्रेस नेता !
11:25
Video thumbnail
Yati Narsinghanand on Ram Mandir Donation THeft : "हिन्दू का गौरव चूर चूर कर दिया..."
00:36
Video thumbnail
Yati Narsinghanand on Gandhi
00:11
Video thumbnail
UP Election 2027 : क्या 2027 चुनाव जीत पाएंगे Chandrashekhar Ravan, या अखिलेश से करेंगे गठबंधन ?
08:40
Video thumbnail
Amit Jani Kala Hiran : काला हिरन फिल्म निर्माता अमित जानी को मिली फ़ोन पर ... सुनें ऑडियो
03:24
Video thumbnail
Akhilesh Yadav : ""जो चढ़ावा चोरी कर सकते हैं वह हमारा वोट चोरी क्यों नहीं कर सकते"
00:10

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related