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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने डीएसपी अयोध्या को लिखा पत्र, बड़े नेताओं से पूछताछ की उठाई मांग!

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: डीएसपी अयोध्या को वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार का पत्र, बड़े नेताओं के बयानों की जांच की मांग

AIN NEWS 1: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे को लेकर दर्ज एफआईआर के बीच अब मामला एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने 4 जुलाई 2026 को अयोध्या के डीएसपी आशुतोष तिवारी को एक विस्तृत पत्र लिखकर उन राजनीतिक नेताओं के बयान दर्ज करने की मांग की है, जिन्होंने सार्वजनिक मंचों पर मंदिर के चढ़ावे में कथित बड़े घोटाले और चोरी के आरोप लगाए हैं।

यह पत्र राम जन्मभूमि थाना, अयोध्या में दर्ज एफआईआर संख्या 0090/2026 के संदर्भ में लिखा गया है। इस एफआईआर में मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और कीमती सामान की कथित चोरी की जांच चल रही है।

पत्र में क्या कहा गया है?

आलोक कुमार ने अपने पत्र में कहा कि जांच एजेंसी निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्य आधारित जांच कर रही है। ऐसे में जिन नेताओं ने करोड़ों और हजारों करोड़ रुपये की चोरी तथा घोटाले के आरोप लगाए हैं, उनसे भी पूछताछ की जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उनके आरोप किस आधार पर लगाए गए हैं।

पत्र में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति के पास इन आरोपों के समर्थन में दस्तावेज, सबूत या अन्य सामग्री मौजूद है तो उसे जांच एजेंसी के सामने प्रस्तुत करना चाहिए। इससे सच्चाई तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

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किन नेताओं का किया गया उल्लेख?

आलोक कुमार ने अपने पत्र में चार प्रमुख नेताओं के सार्वजनिक बयानों का उल्लेख किया है।

1. प्रो. रामगोपाल यादव

पत्र के अनुसार समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने दावा किया था कि श्रीराम मंदिर में लगभग 20,000 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला हुआ है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि श्रद्धालुओं द्वारा दान में दिए गए सोने-चांदी, बहुमूल्य आभूषण और भारी मात्रा में नकदी का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उनके अनुसार इस पूरे मामले में केवल छोटे कर्मचारी ही नहीं बल्कि प्रभावशाली लोग भी शामिल हो सकते हैं।

2. अरविंद केजरीवाल

पत्र में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के सार्वजनिक बयान का भी उल्लेख किया गया है।

उन पर आरोप है कि उन्होंने कहा था कि राम मंदिर से भगवान राम के आभूषण, चरण पादुकाएं, चांदी की ईंटें, दीपक, हीरे-जवाहरात और लगभग 200 करोड़ रुपये नकद चोरी हो गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा था कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

3. सांसद संजय सिंह

आलोक कुमार ने अपने पत्र में राज्यसभा सांसद संजय सिंह के बयान का भी हवाला दिया है।

पत्र के अनुसार संजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि मंदिर के दानपात्रों से 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि गायब हुई है तथा इसमें 50 से अधिक कर्मचारियों की भूमिका हो सकती है।

हालांकि पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भूमि खरीद से जुड़े आरोपों का उल्लेख जानबूझकर नहीं किया गया क्योंकि उस संबंध में संजय सिंह पहले ही विशेष जांच दल (SIT) के समक्ष अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर चुके हैं।

4. प्रियंका गांधी वाड्रा

पत्र में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान का भी उल्लेख है।

उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या केवल छोटे कर्मचारी सीसीटीवी बंद करके इतने बड़े स्तर पर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी कर सकते हैं या इसके पीछे किसी बड़े स्तर की मिलीभगत हो सकती है।

पत्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?

आलोक कुमार ने कहा है कि इन नेताओं ने सार्वजनिक रूप से बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में जांच एजेंसी को उनसे यह जानकारी लेनी चाहिए कि—

उनके आरोपों का तथ्यात्मक आधार क्या है।

उन्हें यह जानकारी कहां से मिली।

क्या उनके पास कोई दस्तावेज, रिकॉर्ड, वीडियो, ऑडियो या अन्य प्रमाण मौजूद हैं।

यदि कोई सबूत है तो उसे जांच एजेंसी को उपलब्ध कराया जाए।

उनका कहना है कि यदि नेताओं के पास विश्वसनीय साक्ष्य होंगे तो जांच एजेंसी को सच्चाई सामने लाने में सहायता मिलेगी।

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यदि आरोप निराधार निकले तो क्या होगा?

पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि किसी व्यक्ति ने बिना किसी तथ्य या सबूत के इतने गंभीर आरोप सार्वजनिक रूप से लगाए हैं, तो यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।

आलोक कुमार ने लिखा कि यदि किसी ने जानबूझकर झूठे, भ्रामक या लापरवाहीपूर्ण आरोप लगाए हैं, जिससे समाज में भ्रम, वैमनस्य या तनाव फैलने की संभावना पैदा होती है, तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई पर भी विचार किया जाना चाहिए।

उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति को बिना प्रमाण के ऐसे गंभीर आरोप लगाने की खुली छूट नहीं दी जा सकती।

एफआईआर संख्या 0090/2026 की जांच जारी

फिलहाल राम जन्मभूमि थाना, अयोध्या में दर्ज एफआईआर संख्या 0090/2026 की जांच जारी है। पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही हैं।

अब वीएचपी अध्यक्ष द्वारा लिखे गए इस पत्र के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसी संबंधित नेताओं को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाती है या नहीं।

राजनीतिक माहौल भी हुआ गर्म

राम मंदिर से जुड़े इस मामले ने राजनीतिक माहौल भी गर्म कर दिया है। विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर आरोप और जवाबी आरोप लगा रहे हैं।

जहां विपक्ष पारदर्शी जांच की मांग कर रहा है, वहीं वीएचपी का कहना है कि जो भी सार्वजनिक आरोप लगाए गए हैं, उन्हें केवल राजनीतिक बयान न मानकर तथ्यों की कसौटी पर भी परखा जाना चाहिए।

जांच एजेंसी के सामने दो संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि जांच एजेंसी के सामने दो महत्वपूर्ण संभावनाएं हैं।

पहली, यदि आरोप लगाने वाले नेताओं के पास ठोस साक्ष्य हैं तो वे जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और मामले की सच्चाई सामने लाने में मदद कर सकते हैं।

दूसरी, यदि आरोप केवल राजनीतिक बयानबाजी साबित होते हैं और उनके समर्थन में कोई तथ्य नहीं मिलता, तो जांच एजेंसी कानून के दायरे में आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती है।

अब आगे क्या?

फिलहाल पूरे मामले की निगाहें अयोध्या पुलिस और जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि पत्र में की गई मांग पर अमल होता है तो आने वाले दिनों में कई प्रमुख नेताओं के बयान दर्ज किए जा सकते हैं।

हालांकि अभी तक जांच एजेंसी की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। साथ ही, पत्र में जिन नेताओं के बयानों का उल्लेख किया गया है, उनकी ओर से भी इस संबंध में कोई नई प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।

राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़ी जांच अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक दावों और राजनीतिक बयानों की विश्वसनीयता की भी परीक्षा बनती जा रही है। वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने अपने पत्र के माध्यम से यह मांग की है कि जिन लोगों ने सार्वजनिक रूप से बड़े दावे किए हैं, उनसे उनके आरोपों के आधार और उपलब्ध साक्ष्यों के बारे में पूछताछ की जाए। अब यह जांच एजेंसी पर निर्भर करेगा कि वह कानून के अनुसार आगे कौन-से कदम उठाती है।

VHP President Alok Kumar has urged the Ayodhya Police to record statements of political leaders who publicly alleged a massive Ram Mandir donation theft. The letter relates to FIR No. 0090/2026 registered at Ram Janmabhoomi Police Station and seeks a fair investigation into claims regarding missing cash, gold, jewellery, and temple offerings. The latest Ram Temple donation investigation has become a major political issue, with demands for evidence-based inquiry and accountability.

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