AIN NEWS 1 | WhatsApp ने हाल ही में अपना नया Username फीचर लॉन्च किया है, जिसके जरिए अब यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए भी दूसरे लोगों से बातचीत कर सकेंगे। कंपनी का कहना है कि यह फीचर यूजर्स की प्राइवेसी को पहले से अधिक सुरक्षित बनाएगा। हालांकि, इस नए बदलाव को लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है और इसके सुरक्षा पहलुओं की समीक्षा करने की तैयारी कर रही है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार यह जानना चाहती है कि कहीं यह फीचर साइबर अपराधियों और ऑनलाइन ठगों के लिए नया हथियार तो नहीं बन जाएगा। यदि जांच के दौरान कोई गंभीर सुरक्षा खामी सामने आती है, तो WhatsApp की पेरेंट कंपनी Meta से जवाब मांगा जा सकता है या उसे नोटिस भी जारी किया जा सकता है।
क्या है WhatsApp का नया Username फीचर?
30 जून को WhatsApp ने वैश्विक स्तर पर अपने नए Username फीचर की शुरुआत की। फिलहाल यूजर्स के लिए केवल यूजरनेम रिजर्व करने का विकल्प उपलब्ध कराया गया है।
इस फीचर के लागू होने के बाद किसी नए व्यक्ति से बातचीत शुरू करने के लिए मोबाइल नंबर साझा करना जरूरी नहीं रहेगा। यूजर अपने यूनिक यूजरनेम के जरिए भी संपर्क स्थापित कर सकेंगे।
WhatsApp का कहना है कि इससे अनजान लोगों के साथ मोबाइल नंबर साझा करने की जरूरत कम होगी और यूजर्स की निजी जानकारी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित रहेगी।
सरकार को क्यों है चिंता?
हालांकि यह फीचर प्राइवेसी बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है, लेकिन सरकार को इसकी सुरक्षा को लेकर कुछ गंभीर आशंकाएं हैं।
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे के नाम या उससे मिलते-जुलते यूजरनेम का इस्तेमाल करता है या अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर लोगों से संपर्क करता है, तो ऑनलाइन धोखाधड़ी के नए मामले सामने आ सकते हैं।
सरकार इसी संभावना का आकलन करने के लिए फीचर की तकनीकी और सुरक्षा संबंधी समीक्षा करने की तैयारी कर रही है।
टेलीग्राम जैसे मामलों से बढ़ी चिंता
WhatsApp का नया फीचर काफी हद तक Telegram के यूजरनेम सिस्टम जैसा माना जा रहा है।
टेलीग्राम पर पहले भी फर्जी यूजरनेम, नकली प्रोफाइल और पहचान छिपाकर लोगों से ठगी करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। इन्हीं अनुभवों को देखते हुए सरकार WhatsApp के नए फीचर को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहचान सत्यापित करने की व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तो साइबर अपराधी इस सुविधा का दुरुपयोग कर सकते हैं।
सोशल मीडिया पर भी उठे सवाल
WhatsApp के नए फीचर को लेकर सोशल मीडिया पर भी मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
कई यूजर्स का कहना है कि मोबाइल नंबर छिपाने की सुविधा प्राइवेसी के लिहाज से अच्छी पहल है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति, कंपनी या सेलिब्रिटी से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाना आसान हुआ, तो लोग आसानी से भ्रमित हो सकते हैं और साइबर ठगी के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।
WhatsApp ने क्या सुरक्षा उपाय किए हैं?
WhatsApp का कहना है कि यूजरनेम फीचर को कई सुरक्षा उपायों के साथ तैयार किया गया है।
कंपनी के अनुसार—
- प्रत्येक यूजरनेम पूरी तरह यूनिक होगा।
- कुछ हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील नाम पहले से सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि उनकी नकल न की जा सके।
- किसी भी तरह की सार्वजनिक Username Directory उपलब्ध नहीं होगी।
- किसी व्यक्ति का यूजरनेम तभी इस्तेमाल किया जा सकेगा, जब वह पहले से पता हो या संबंधित व्यक्ति स्वयं साझा करे।
इन उपायों का उद्देश्य फर्जी प्रोफाइल और पहचान की नकल जैसी गतिविधियों को सीमित करना है।
जांच में क्या देखेगी सरकार?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, समीक्षा के दौरान यह जांच की जा सकती है कि—
- फर्जी यूजरनेम बनाना कितना आसान या कठिन होगा।
- किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान की नकल रोकने के लिए क्या सुरक्षा व्यवस्था है।
- साइबर अपराध की स्थिति में जांच एजेंसियों को यूजर की पहचान तक पहुंचने में कोई दिक्कत तो नहीं होगी।
- प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सुरक्षा उपाय भारतीय कानूनों और साइबर सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।
WhatsApp का नया Username फीचर यूजर्स की प्राइवेसी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार इस बात को सुनिश्चित करना चाहती है कि यह सुविधा साइबर अपराधियों के लिए नया माध्यम न बन जाए।
फिलहाल सरकार सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े पहलुओं की समीक्षा करने की तैयारी कर रही है। यदि जांच में कोई गंभीर खामी सामने आती है, तो Meta से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है या आवश्यक नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है।


















