ऐ जिंदगी: 18 साल से दर्द में जी रहा जावेद, दुर्लभ जेनेटिक बीमारी ने छीन ली सामान्य जिंदगी
AIN NEWS 1: कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं जिनका नाम भी बहुत कम लोग जानते हैं। इन बीमारियों का दर्द केवल मरीज ही नहीं, बल्कि पूरा परिवार हर दिन महसूस करता है। गुजरात के अहमदाबाद में रहने वाले 26 वर्षीय जावेद की कहानी भी ऐसी ही है। बचपन में एक सामान्य बच्चे की तरह दिखने वाला जावेद आज पिछले 18 वर्षों से बिस्तर और असहनीय दर्द के बीच जिंदगी गुजार रहा है।
उसके शरीर की लगभग सभी प्रमुख हड्डियां और जोड़ प्रभावित हो चुके हैं। चलना-फिरना तो दूर, बिस्तर से उठना और दोबारा लेटना भी उसके लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। डॉक्टरों ने उसे दुर्लभ जेनेटिक बीमारी मार्कियो सिंड्रोम (Mucopolysaccharidosis Type IV – Morquio Syndrome) से पीड़ित बताया है। इस बीमारी का इलाज पूरी तरह संभव नहीं है और राहत देने वाली एंजाइम थेरेपी पर हर साल लगभग 3 से 4 करोड़ रुपये का खर्च आता है।

बचपन से दिखने लगे थे बीमारी के संकेत
जावेद का जन्म वर्ष 2000 में हुआ था। शुरुआती कुछ महीनों तक सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन धीरे-धीरे उसके शरीर का विकास रुकने लगा। उसका शरीर कमजोर होता गया जबकि सिर अपेक्षाकृत बड़ा दिखाई देने लगा। परिवार ने कई डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन हर बार यही कहा गया कि बच्चा बड़ा होगा तो सब ठीक हो जाएगा।
समय बीतता गया और परिवार ने भी यही मान लिया कि यह सामान्य कमजोरी है। हालांकि जावेद अक्सर चलते समय गिर जाता था और उसके शरीर में कमजोरी साफ दिखाई देने लगी थी।
एक घटना जिसने पूरी जिंदगी बदल दी
करीब आठ वर्ष की उम्र में स्कूल में खेलते समय जावेद अचानक गिर पड़ा। उसके घुटनों और कोहनियों में इतना तेज दर्द हुआ कि वह अपने पैरों पर खड़ा तक नहीं हो सका। स्कूल प्रशासन ने परिवार को बुलाया और अस्पताल ले जाया गया।
शुरुआत में डॉक्टरों ने इसे सामान्य मांसपेशियों की समस्या मानते हुए दवाइयां दीं। जब कोई सुधार नहीं हुआ तो परिवार ने घरेलू इलाज और धार्मिक उपाय भी अपनाए, लेकिन हालत लगातार बिगड़ती गई।
कुछ ही वर्षों में जावेद का चलना-फिरना लगभग बंद हो गया और उसके शरीर के जोड़ सूजकर कठोर होने लगे।
धीरे-धीरे बिस्तर तक सीमित हो गई जिंदगी
बीमारी बढ़ने के साथ जावेद की हालत लगातार खराब होती गई। उसके घुटने, कूल्हे, कोहनी, कलाई और रीढ़ की हड्डी प्रभावित होने लगी। अब स्थिति यह है कि उसे बिस्तर से उठने में लगभग आधा घंटा लग जाता है। कई बार दर्द इतना असहनीय होता है कि वह घंटों तक हिल भी नहीं पाता।
वह बताता है कि 26 वर्ष की उम्र में भी उसे नहाने, कपड़े पहनने और शौचालय जाने तक के लिए अपने पिता का सहारा लेना पड़ता है। यह उसके लिए शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद कठिन स्थिति है।
वॉशरूम में फंसने की घटना आज भी डराती है
कुछ समय पहले जावेद शौचालय गया था। अचानक उसके पूरे शरीर में तेज दर्द शुरू हो गया और घुटने पूरी तरह जाम हो गए। वह कमोड से उठ नहीं पाया। काफी देर तक संघर्ष करने के बाद उसने अपने पिता को आवाज लगाई।
जब काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला तो पिता पड़ोसी को लेकर पहुंचे और दरवाजा तोड़ना पड़ा। इसके बाद दोनों ने मिलकर उसे बाहर निकाला। इस घटना के बाद से जावेद आज तक वॉशरूम का दरवाजा अंदर से बंद नहीं करता।
500 मीटर की दूरी भी बन गई चुनौती
एक बार पिता ने उसे घर के पास दुकान से बिस्किट लाने भेजा। रास्ते में अचानक उसके जोड़ों में तेज दर्द शुरू हो गया और वह सड़क पर ही गिर गया। राहगीरों ने उसके पिता को फोन कर बुलाया।
इसके बाद कई महीनों तक वह बिस्तर से उठ भी नहीं पाया। ऐसे कई हादसों ने परिवार को समझा दिया कि बीमारी अब तेजी से बढ़ रही है।
आखिरकार जेनेटिक टेस्ट से सामने आई सच्चाई
कई ऑर्थोपेडिक डॉक्टरों से इलाज कराने के बाद विशेषज्ञों ने जेनेटिक जांच कराने की सलाह दी। रिपोर्ट आने के बाद पता चला कि जावेद मार्कियो सिंड्रोम (MPS Type IV) नाम की दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित है।
परिवार के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं थी। डॉक्टरों ने बताया कि इस बीमारी का स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है और समय के साथ शरीर की हड्डियां और जोड़ लगातार खराब होते जाएंगे।
परिवार में दो बच्चों को निकली यही बीमारी
जावेद की बीमारी सामने आने के बाद उसके छोटे भाई और जुड़वा बहन हिब्बा की भी जांच कराई गई। जांच में पता चला कि बहन को भी यही बीमारी है, जबकि छोटा भाई पूरी तरह स्वस्थ है।
हिब्बा फिलहाल अपना अधिकांश काम खुद कर लेती है, लेकिन उसके घुटनों में दर्द रहता है और हाथ-पैर की उंगलियां भी हल्की टेढ़ी हो चुकी हैं। परिवार को डर है कि आने वाले वर्षों में उसकी स्थिति भी गंभीर हो सकती है।
माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता
जावेद की मां सरकारी शिक्षिका हैं और नौकरी के कारण दूसरे शहर में तैनात हैं। वह हर सप्ताह बेटे से मिलने आती हैं। उनका कहना है कि सबसे बड़ा डर यह है कि उनके बाद जावेद की देखभाल कौन करेगा।
दूसरी ओर, पिता पिछले कई वर्षों से बेटे की पूरी जिम्मेदारी अकेले निभा रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय बेटे की सेवा में लगा दिया है। उनका कहना है कि रात में कई बार बेटे की दर्द भरी आवाज सुनकर उनकी भी नींद टूट जाती है।
आखिर यह बीमारी होती क्यों है?
विशेषज्ञों के अनुसार मार्कियो सिंड्रोम एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है। इसमें शरीर के GALNS या GLB1 जीन में खराबी आ जाती है। इसके कारण शरीर कुछ विशेष शर्करा (GAGs) को ठीक तरह से नहीं तोड़ पाता।
धीरे-धीरे यही पदार्थ शरीर के जोड़ों, हड्डियों, आंखों, हृदय और अन्य अंगों में जमा होने लगता है। परिणामस्वरूप हड्डियां टेढ़ी होने लगती हैं, जोड़ कठोर हो जाते हैं, रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और समय के साथ मरीज की चलने-फिरने की क्षमता खत्म होने लगती है।
करीबी रिश्तों में शादी से क्यों बढ़ता है खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार जब परिवार के करीबी रिश्तेदारों के बीच विवाह होता है तो दोनों में समान प्रकार के दोषपूर्ण जीन होने की संभावना अधिक रहती है। यदि माता-पिता दोनों में एक ही खराब जीन मौजूद हो तो बच्चे में ऐसी आनुवंशिक बीमारी विकसित होने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं कि हर करीबी रिश्ते में शादी से जन्म लेने वाले बच्चे को यह बीमारी होगी, लेकिन सामान्य आबादी की तुलना में जोखिम अधिक माना जाता है। ऐसे परिवारों को विवाह से पहले जेनेटिक काउंसलिंग और आवश्यकता होने पर जेनेटिक जांच कराने की सलाह दी जाती है।
क्या इसका इलाज संभव है?
फिलहाल इस बीमारी का स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है। मरीजों को राहत देने के लिए एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी (Enzyme Replacement Therapy) दी जाती है। इसमें शरीर में हर सप्ताह कृत्रिम एंजाइम पहुंचाया जाता है, जिससे बीमारी की गति कुछ हद तक धीमी हो सकती है और दर्द में राहत मिल सकती है।
हालांकि यह उपचार पहले से टेढ़ी हो चुकी हड्डियों या जाम हो चुके जोड़ों को सामान्य नहीं बना सकता। सबसे बड़ी चुनौती इसकी लागत है, जो सालाना लगभग 3 से 4 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। यही कारण है कि अधिकांश मरीज इस इलाज तक नहीं पहुंच पाते।
शुरुआती पहचान क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बचपन में ही बीमारी की पहचान हो जाए तो समय रहते इलाज और फिजियोथेरेपी शुरू कर मरीज की जीवन गुणवत्ता को कुछ हद तक बेहतर बनाया जा सकता है। लगातार चिकित्सकीय निगरानी से हृदय, आंखों और सांस संबंधी जटिलताओं पर भी नजर रखी जा सकती है।
जावेद की कहानी केवल एक व्यक्ति की बीमारी की कहानी नहीं है, बल्कि दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों से जूझ रहे हजारों परिवारों की हकीकत को सामने लाती है। समय पर जेनेटिक जांच, सही जानकारी, विशेषज्ञ उपचार और सरकारी सहायता ऐसे मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। वहीं समाज में भी दुर्लभ बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि किसी परिवार को वर्षों तक सही बीमारी का पता लगाने के लिए भटकना न पड़े और मरीजों को समय पर उचित इलाज मिल सके।
नोट (तथ्यात्मक स्पष्टता): इस लेख में करीबी रिश्तों में विवाह और जेनेटिक बीमारी के संबंध को चिकित्सकीय शोध के आधार पर संतुलित रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य किसी समुदाय या परंपरा पर टिप्पणी करना नहीं, बल्कि आनुवंशिक जोखिम और चिकित्सकीय जागरूकता की जानकारी देना है।
Morquio Syndrome (MPS IV) is a rare genetic disorder that affects bone development, joints, the spine, heart, and eyes. This emotional story highlights the lifelong struggle of a young patient diagnosed with Morquio Syndrome after years of unexplained pain and disability. The article explains how consanguineous marriage (marriage between close relatives) increases the risk of inherited genetic diseases, the importance of genetic testing, symptoms, diagnosis, enzyme replacement therapy, treatment cost, and the need for early medical intervention for rare diseases in India.


















