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हापुड़ की PCS अधिकारी डॉ. सीमा चौधरी का पलटवार: “मां ने जमीन विवाद में कराई FIR, मेरी छवि खराब करने की कोशिश”!

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हापुड़ की PCS अधिकारी डॉ. सीमा चौधरी का पलटवार: “मां ने जमीन विवाद में कराई FIR, मेरी छवि खराब करने की कोशिश”

AIN NEWS 1 सहारनपुर/हापुड़। उत्तर प्रदेश की 2017 बैच की PCS अधिकारी एवं वर्तमान में हापुड़ की जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) डॉ. सीमा चौधरी ने अपनी मां द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे पर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें अपने खिलाफ सहारनपुर में दर्ज हुई एफआईआर की कोई जानकारी नहीं थी। इसकी सूचना उन्हें गुरुवार सुबह मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए मिली।

डॉ. सीमा का कहना है कि बिना किसी निष्पक्ष जांच के उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया और उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा कि पूरा विवाद पारिवारिक जमीन से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर पहले से अदालत में मामला लंबित है।

मीडिया से मिली FIR की जानकारी

डॉ. सीमा चौधरी के अनुसार, उन्हें इससे पहले न तो पुलिस की ओर से कोई नोटिस मिला और न ही किसी प्रकार की पूछताछ की गई। गुरुवार सुबह समाचार देखने के बाद ही उन्हें पता चला कि उनकी मां मुनेश रानी ने उनके और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ सहारनपुर के सरसावा थाने में एफआईआर दर्ज करा दी है।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने मामले की सच्चाई जानने की कोशिश नहीं की और बिना तथ्यों की गहन जांच किए मुकदमा दर्ज कर लिया। इससे उनकी सामाजिक और प्रशासनिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास हुआ है।

मां ने क्या लगाए हैं आरोप?

30 जून को दर्ज कराई गई शिकायत में मुनेश रानी ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी डॉ. सीमा चौधरी, देवर संजीव कुमार चौधरी, देवरानी के पिता राजेंद्र राणा, गंभीर और नरेश कुमार ने मिलकर उनकी कृषि भूमि पर कब्जा करने की साजिश रची।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि डॉ. सीमा ने अपनी कथित “काली कमाई” छिपाने के लिए उनकी जानकारी के बिना उनके नाम बैंक खाता खुलवाया और उसमें 15 लाख रुपये जमा कराए। विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

इन्हीं आरोपों के आधार पर सरसावा थाना पुलिस ने डॉ. सीमा सहित पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

“हमारे परिवार में पहले कभी ऐसा विवाद नहीं था”

डॉ. सीमा का कहना है कि उनके परिवार में पहले कभी इस प्रकार का विवाद सामने नहीं आया। उनकी मां से नियमित बातचीत होती थी और पारिवारिक संबंध सामान्य थे। ऐसे में अचानक उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होना उनके लिए भी हैरान करने वाला है।

उन्होंने यह भी कहा कि मुकदमा दर्ज होने के बाद उनकी तस्वीरें और व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया तथा विभिन्न माध्यमों में वायरल की गईं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

परिवार की जमीन को लेकर क्या है विवाद?

डॉ. सीमा ने बताया कि उनके पिता महिपाल सिंह किसान हैं और लगभग 65 वर्ष के हैं। वे हार्ट सर्जरी सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। परिवार आज भी संयुक्त परिवार के रूप में रह रहा है और उनकी दादी भी जीवित हैं।

उन्होंने बताया कि परिवार की पैतृक जमीन दादा के हिस्से से सीधे पिता के नाम कराने के बजाय परिवार की सहमति से उनकी मां मुनेश रानी के नाम दर्ज कराई गई थी।

डॉ. सीमा के अनुसार, उनकी मां के नाम लगभग 32 बीघा कृषि भूमि दर्ज है।

“17 बीघा जमीन मां ने खुद बेची”

डॉ. सीमा का दावा है कि उनकी मां ने अपने नाम की लगभग 17 बीघा जमीन देहरादून निवासी अनुपम जोशी को बेच दी। उनका कहना है कि बिक्री से मिलने वाली पूरी धनराशि सीधे उनकी मां के बैंक खाते में गई।

हालांकि, परिवार का आरोप है कि यह जमीन बेहद कम कीमत पर बेची गई, जबकि उसकी बाजार कीमत कहीं अधिक थी। इसी कारण परिवार ने इस बिक्री को अदालत में चुनौती दी है और फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

उन्होंने कहा कि विवादित जमीन का कब्जा आज भी परिवार के पास है।

भाई की पढ़ाई को लेकर भी बढ़ा विवाद

डॉ. सीमा ने बताया कि परिवार में चार बहनें और एक भाई हैं। इकलौते भाई की पढ़ाई के लिए परिवार ने विदेश भेजकर काफी आर्थिक सहयोग किया।

उनके अनुसार, उनकी मां लगातार भाई की पढ़ाई के नाम पर और धनराशि देने की बात कहती थीं। परिवार का मानना था कि पहले ही पर्याप्त पैसा खर्च किया जा चुका है और आगे जमीन बेचकर पैसा देना उचित नहीं होगा।

यहीं से परिवार के भीतर मतभेद बढ़ने लगे।

“चोरी-छिपे जमीन बेच दी गई”

डॉ. सीमा का आरोप है कि परिवार को विश्वास में लिए बिना जमीन का सौदा किया गया। उनका कहना है कि जमीन की वास्तविक कीमत कहीं अधिक थी, लेकिन उसे कम दामों पर बेच दिया गया।

उन्होंने कहा कि परिवार ने इस बिक्री का विरोध किया और अदालत का दरवाजा खटखटाया। फिलहाल भूमि विवाद का मामला न्यायिक प्रक्रिया में है।

खरीदार और परिवार के बीच भी विवाद

डॉ. सीमा ने बताया कि उनके चाचा संजीव चौधरी ने जमीन खरीदने वाले पक्ष से कहा था कि जितनी राशि देकर जमीन खरीदी गई है, उतनी रकम वापस कर दी जाएगी और जमीन परिवार के पास ही रहेगी।

लेकिन अब खरीदार कथित तौर पर जमीन की वर्तमान बाजार कीमत के हिसाब से कहीं अधिक राशि की मांग कर रहा है। डॉ. सीमा का मानना है कि इसी विवाद के चलते उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।

बैंक खाते पर क्या बोलीं डॉ. सीमा?

एफआईआर में लगाए गए बैंक खाते संबंधी आरोपों को डॉ. सीमा ने पूरी तरह निराधार बताया।

उन्होंने कहा कि संबंधित बैंक खाता उनकी मां का ही है और बैंक में खाता खुलवाने की पूरी प्रक्रिया ग्राहक की उपस्थिति तथा केवाईसी दस्तावेजों के आधार पर होती है। ऐसे में बिना जानकारी के खाता खुलवाने का आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

डॉ. सीमा का दावा है कि खाते में जो रकम जमा हुई, उसमें 10 लाख रुपये उनके नाना राजेंद्र राणा ने यूपीआई के माध्यम से भेजे थे, जबकि 5 लाख रुपये संजीव चौधरी द्वारा ट्रांसफर किए गए थे।

उनका कहना है कि यह राशि भी उनकी मां के कहने पर भाई की जरूरतों के लिए भेजी गई थी। बैंक रिकॉर्ड और जांच से पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।

“भू-माफिया से मेरा कोई संबंध नहीं”

डॉ. सीमा चौधरी ने अपने ऊपर लगाए गए भू-माफिया से जुड़े आरोपों को भी सिरे से खारिज किया।

उन्होंने कहा कि एक प्रशासनिक अधिकारी होने के बावजूद उन्हें बिना किसी आधार के ऐसे मामलों से जोड़ना उनकी छवि खराब करने का प्रयास है। उन्होंने भरोसा जताया कि जांच में सभी तथ्य सामने आ जाएंगे और सच सबके सामने होगा।

परिवार की प्रोफाइल

डॉ. सीमा चौधरी सहारनपुर जिले के सरसावा क्षेत्र स्थित मीरपुर-सीतापुर गांव की रहने वाली हैं।

पिता महिपाल सिंह किसान हैं।

सबसे बड़ी बहन सोनिया की शादी हो चुकी है।

डॉ. सीमा चौधरी 2017 बैच की PCS अधिकारी हैं और वर्तमान में हापुड़ में जिला पूर्ति अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।

तीसरी बहन शालू चौधरी विवाहित हैं।

सबसे छोटी बहन पूजा अपनी मां के साथ दिल्ली में रहती हैं।

इकलौते भाई अनिकेत ने यूके से MBA करने के बाद वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में नौकरी कर रहे हैं।

डॉ. सीमा की पहली महत्वपूर्ण तैनाती सितंबर 2020 से जुलाई 2024 तक गाजियाबाद में जिला पूर्ति अधिकारी के रूप में रही।

फिलहाल क्या है स्थिति?

इस पूरे मामले में एक ओर मां ने बेटी और परिवार के अन्य सदस्यों पर जमीन कब्जाने, बैंक खाते और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर डॉ. सीमा चौधरी ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए इसे जमीन के पारिवारिक विवाद से जोड़ दिया है।

भूमि बिक्री का मामला पहले से न्यायालय में लंबित है, जबकि दर्ज एफआईआर की जांच अब पुलिस कर रही है। बैंक खातों में हुए लेन-देन, जमीन बिक्री और अन्य आरोपों की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और मामले पर सभी की नजर बनी हुई है।

Hapur DSO Dr. Seema Chaudhary, a 2017 batch PCS officer, has responded after an FIR was registered against her in Saharanpur following allegations made by her mother, Munesh Rani. The case revolves around a family land dispute, bank account transactions, and accusations of illegal property dealings. Dr. Seema has denied all allegations, claiming the FIR is linked to an ongoing civil dispute over agricultural land and has damaged her public image. Read the complete story covering the FIR, family dispute, land sale controversy, and the latest developments from Uttar Pradesh.

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