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Ghaziabad News: छह साल बाद विधवा अंजलि को मिला घर, डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ का जताया आभार

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AIN NEWS 1 गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश: पति की मौत के बाद चार बच्चों की जिम्मेदारी और रहने के लिए छत की चिंता। एक महिला के लिए यह संघर्ष करीब छह साल तक चला। कई बार पुलिस चौकी और थाने के चक्कर लगाने के बावजूद जब समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो उसने जिलाधिकारी के जनता दर्शन में अपनी फरियाद रखी। अब प्रशासन की कार्रवाई के बाद महिला को अपने मकान पर कब्जा मिल गया है। खुशी का इजहार करने के लिए वह मंगलवार को मिठाई लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंची और डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ का आभार जताया। यह मामला गाजियाबाद के मोदीनगर क्षेत्र की रहने वाली अंजलि से जुड़ा है।

पति की मौत के बाद चार बच्चों की जिम्मेदारी

अंजलि के पति अशोक कुमार का निधन वर्ष 2015 में हो गया था। पति के गुजर जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। पति की मौत के बाद बच्चों की परवरिश करना और परिवार को संभालना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया।

अंजलि की ससुराल गाजियाबाद के अर्थला स्थित संजय कॉलोनी में बताई गई है, जबकि वह मोदीनगर के कृष्णा नगर क्षेत्र की निवासी हैं। पति के निधन के बाद भी वह अपने परिवार और मकान से जुड़े अधिकारों को लेकर संघर्ष करती रहीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 में उनके जेठ ने मकान में शौचालय और स्नानघर बनवाने की बात कहकर उन्हें कुछ समय के लिए घर से बाहर जाने को कहा था। अंजलि अपने बच्चों के साथ वहां से चली गईं, लेकिन जब वह वापस लौटीं तो उन्हें दोबारा मकान में रहने नहीं दिया गया। इसके बाद से ही उनके सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई।

पुलिस और अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद भी नहीं मिली राहत

अंजलि के लिए यह सिर्फ मकान का मामला नहीं था, बल्कि चार बच्चों के साथ सुरक्षित जीवन बिताने का सवाल भी था। पति की मृत्यु के बाद परिवार का सहारा सीमित था और ऐसे में अपने रहने के अधिकार के लिए लगातार प्रयास करना उनके लिए आसान नहीं था।

बताया गया है कि उन्होंने अपनी समस्या के समाधान के लिए कई बार पुलिस चौकी, थाने और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया। इसके बावजूद लंबे समय तक उन्हें राहत नहीं मिल सकी। समय बीतने के साथ उनकी परेशानी बनी रही।

किसी भी परिवार के लिए अपना घर केवल रहने की जगह नहीं होता। वह सुरक्षा, स्थिरता और भविष्य की उम्मीद से भी जुड़ा होता है। खासकर तब, जब परिवार में छोटे बच्चों की जिम्मेदारी हो और कमाने वाले सदस्य का साथ छूट चुका हो। अंजलि के लिए भी मकान पर दोबारा अधिकार पाने की लड़ाई इसी तरह की मुश्किलों से भरी रही।

जनता दर्शन में डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ के सामने रखी फरियाद

लंबे समय तक परेशान रहने के बाद अंजलि को जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ के जनता दर्शन के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने सितंबर 2026 में जिलाधिकारी के सामने अपनी समस्या रखी और मदद की गुहार लगाई।

जनता दर्शन का उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों को सुनना और संबंधित विभागों के माध्यम से उनका समाधान कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। अंजलि को उम्मीद थी कि यहां उनकी बात सुनी जाएगी और वर्षों से चली आ रही समस्या का कोई रास्ता निकलेगा।

मामले की जानकारी मिलने के बाद जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को शिकायत की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद अधिकारियों ने महिला से जानकारी ली और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की।

रिपोर्ट के अनुसार, जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अंजलि को उनके मकान पर कब्जा दिलाया गया। इस तरह वर्षों से चल रहा उनका संघर्ष एक अहम पड़ाव पर पहुंचा और उन्हें अपने घर में रहने का अधिकार वापस मिला।

छह साल बाद मिली राहत, मिठाई लेकर पहुंचीं अंजलि

मकान पर दोबारा कब्जा मिलने के बाद अंजलि ने राहत की सांस ली। उनके लिए यह सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि अपने और अपने बच्चों के भविष्य को लेकर लंबे समय से बनी चिंता कम होने का मौका था।

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को अंजलि मिठाई लेकर जनता दर्शन में पहुंचीं। इस बार उनके पास शिकायत नहीं, बल्कि अपनी समस्या का समाधान होने की खुशी थी। उन्होंने जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ के प्रति आभार जताया और वहां मौजूद लोगों का मुंह मीठा कराया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वह अपनी दो बेटियों के साथ वहां पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि मकान मिलने से उन्हें और उनके चार बच्चों को फिर से छत का सहारा मिला है।

अंजलि की यह मुलाकात इस बात का उदाहरण बनकर सामने आई कि किसी शिकायत का समाधान होने पर संबंधित व्यक्ति के लिए वह कितना बड़ा बदलाव ला सकता है। जिस कार्यालय में वह पहले अपनी परेशानी लेकर पहुंची थीं, उसी जगह दोबारा आकर उन्होंने अपनी खुशी जाहिर की।

डीएम की कार्यशैली को लेकर क्यों हो रही चर्चा?

गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ की कार्यशैली को लेकर यह मामला चर्चा में है। जनसुनवाई में शिकायत मिलने के बाद जांच कराने और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश देने की प्रक्रिया इस मामले में अहम रही।

हालांकि किसी भी शिकायत में अंतिम निर्णय उपलब्ध दस्तावेजों, तथ्यों और लागू कानून के आधार पर ही किया जाना चाहिए। इस मामले में भी प्रशासन की जांच के बाद अंजलि को मकान पर कब्जा दिलाए जाने की जानकारी सामने आई है।

रविंद्र कुमार मांदड़ उत्तर प्रदेश कैडर के 2013 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। गाजियाबाद जिले की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, उन्होंने 28 जुलाई 2025 को जिलाधिकारी का पद संभाला था।

जनता दर्शन जैसे कार्यक्रमों की उपयोगिता तभी सामने आती है, जब शिकायतों को केवल दर्ज करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनकी जांच कर समयबद्ध तरीके से समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएं। अंजलि का मामला इसी प्रक्रिया के महत्व को सामने लाता है।

जरूरतमंद लोगों के लिए क्या है इस मामले का संदेश?

अंजलि की कहानी उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से किसी समस्या के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। यदि किसी व्यक्ति की शिकायत का समाधान नहीं हो रहा है, तो वह संबंधित विभाग में लिखित शिकायत देने के साथ जिलाधिकारी कार्यालय की जनसुनवाई में भी अपनी बात रख सकता है।

ऐसी शिकायत करते समय संबंधित दस्तावेज, पुराने आवेदन, उपलब्ध आदेश और अन्य जरूरी प्रमाण साथ रखना उपयोगी होता है। इससे अधिकारियों को मामले की जांच करने में मदद मिल सकती है। हालांकि हर मामले का परिणाम उसके तथ्यों और कानूनी स्थिति पर निर्भर करता है।

अंजलि के मामले में भी शिकायत के बाद अधिकारियों ने जानकारी और दस्तावेजों की जांच की तथा आगे की कार्रवाई की। मकान पर कब्जा मिलने के बाद महिला ने मिठाई बांटकर अपना आभार जताया।

छह साल तक चले संघर्ष के बाद अंजलि को मिली राहत की यह कहानी बताती है कि आम नागरिक की समस्या को सुनना और उस पर कार्रवाई करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। चार बच्चों के साथ अपने घर के लिए संघर्ष कर रही अंजलि के लिए अब सबसे बड़ी राहत यही है कि उन्हें अपने मकान पर दोबारा रहने का सहारा मिल गया है।

नोट: उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार इस खबर में मकान पर कब्जा मिलने की जानकारी दी गई है। संपत्ति के स्वामित्व, प्रशासनिक आदेश और कार्रवाई के कानूनी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों की जांच आवश्यक होगी।

Widow Anjali has received relief in her long-pending house dispute following intervention by Ghaziabad District Magistrate Ravindra Kumar Mandar. After her husband Ashok Kumar died, Anjali faced difficulties raising her four children and regaining access to her house. According to media reports, she approached the DM during Janata Darshan in September 2026. Following an administrative inquiry and action by the concerned officials, she regained possession of the house. Anjali later visited the public hearing with sweets to thank the Ghaziabad DM. The case highlights the importance of public grievance redressal, administrative accountability and support for families facing housing disputes in Uttar Pradesh.

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Pawan Chaudhary
Pawan Chaudhary
पवन चौधरी एक सक्रिय पत्रकार एवं समाचार लेखक हैं, जो जनहित से जुड़े मुद्दों, स्थानीय घटनाक्रम और सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता से अपनी पत्रकारिता में स्थान देते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के माध्यम से पवन चौधरी आम लोगों की समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय घटनाओं को सामने लाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य निष्पक्ष एवं जिम्मेदार पत्रकारिता के जरिए समाज में जागरूकता बढ़ाना और महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों की आवाज बनाना है।

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